ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल इंडिया के साथ एक गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य सार्वजनिक खरीद और बाजार से जुड़े उद्यम विकास के ज़रिए महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों, खासकर स्वयं सहायता समूहों के उद्यमों, को मजबूत करना है। यह समझौता 2026 से 2029 तक तीन वर्षों के लिए है। दोनों पक्षों के बीच न तो धन का हस्तांतरण होगा और न कोई वित्तीय जिम्मेदारी बनेगी। समझौते के तहत होने वाले कामों का खर्च हर पक्ष स्वयं उठाएगा।
यह समझौता 2022 में शुरू हुए उस सहयोग को औपचारिक रूप देता है, जिसे बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन से समर्थित महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए सार्वजनिक खरीद पहल के तहत चलाया गया था। उद्यमों को खरीद के लिए तैयार करने, उनकी क्षमता बढ़ाने और बाजार से जोड़ने के ज़रिए सरकारी तथा संस्थागत खरीद में उनकी भागीदारी बढ़ाना साझेदारी का लक्ष्य है।
इसके तहत दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में राष्ट्रीय संसाधन प्रकोष्ठ, यानी सार्वजनिक खरीद और व्यवसाय मॉडल सहायता प्रकोष्ठ, स्थापित करने का प्रस्ताव है। पीसीआई इंडिया तकनीकी सहायता देगा और यह प्रकोष्ठ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों में खरीद से जुड़े उद्यम तंत्र को मजबूत करने में मदद करेगा। सहयोग के दायरे में उद्यम संवर्धन की रूपरेखा, मानक कार्यप्रणाली, कामकाजी साधन और एकसमान क्षमता-विकास पाठ्यक्रम तैयार करना शामिल है। सरकारी ई-बाजार पर पंजीकरण, निविदा में भागीदारी, गुणवत्ता मानक, दस्तावेज तैयार करने और खरीद नियमों के पालन पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
वित्त वर्ष 2026-27 में असम, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पहले चरण की विशेष तकनीकी सहायता प्रस्तावित है। दूसरे राज्यों के साथ भी व्यापक भागीदारी बढ़ाई जाएगी। यह सहयोग नवीकरणीय ऊर्जा, टिकाऊ उत्पादन, राज्यों के बीच सीख के आदान-प्रदान और विस्तार योग्य खरीद-आधारित व्यवसाय मॉडल को आगे बढ़ाएगा। साझेदारी टिकाऊ, उद्यम-आधारित और बाजार से जुड़ी आजीविकाओं के ज़रिए 6 करोड़ लखपति दीदियां तैयार करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।
