प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि यानी प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना 1 जून 2020 को शुरू हुई। इसका उद्देश्य शहरी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण देना है। 12 जुलाई 2026 तक 76.95 लाख विक्रेताओं को ₹18,475 करोड़ से अधिक के 1.15 करोड़ से अधिक ऋण मिल चुके थे। इनमें 29.71 लाख विक्रेताओं ने दूसरी और 8.49 लाख ने तीसरी ऋण किस्त ली।

हैदराबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस ने 2023 और 2025 में योजना के असर का अध्ययन किया। 2023 के अध्ययन में 100 शहरी स्थानीय निकायों के 5,000 से अधिक लाभार्थी शामिल थे। इनमें 95% के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि बैंक से लिया गया पहला ऋण था और उन्होंने इसका उपयोग कारोबार बढ़ाने में किया। 2025 के अध्ययन में 99 शहरी स्थानीय निकायों के 5,000 से अधिक लाभार्थी शामिल थे; इनमें लगभग 60% उत्तरदाता 2023 के नमूने का भी हिस्सा थे। अध्ययन के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच ऋण लेने वालों की औसत वार्षिक कारोबारी आय लगभग 20% बढ़ी। सभी किस्तों के लगभग 30% ऋणधारकों ने प्रधानमंत्री स्वनिधि के अलावा अन्य ऋण होने की जानकारी दी। इस दौरान डिजिटल भुगतान अपनाने में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

योजना में प्रत्येक ऋण किस्त पर 12 महीने तक हर महीने अधिकतम ₹100, यानी साल में ₹1,200 तक की वापसी राशि मिलती है। पुनर्गठित योजना में कम से कम ₹2,000 की थोक खरीद का डिजिटल भुगतान करने पर 4 तिमाहियों तक हर तिमाही अधिकतम ₹100 का प्रावधान है। मई 2026 तक 875 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन हुए और ₹412 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी हुई। ‘स्वनिधि से समृद्धि’ घटक लाभार्थियों को केंद्र की 8 चुनी हुई कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ता है। 12 जुलाई 2026 तक 50.63 लाख लाभार्थियों का सामाजिक-आर्थिक ब्योरा तैयार कर उन्हें 1.56 करोड़ योजना स्वीकृतियाँ दी जा चुकी थीं।