कोलंबिया के बुकारामंगा में हुई 56वीं अंतर्राष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (IPhO) 2026 में भारतीय टीम के पाँचों सदस्यों ने स्वर्ण पदक जीते। इस प्रदर्शन के बल पर भारत ने चीन, कज़ाकिस्तान, रूस, दक्षिण कोरिया और ताइवान के साथ संयुक्त रूप से विश्व में पहला स्थान हासिल किया। इस ओलंपियाड में 87 देशों के 381 छात्र शामिल हुए थे।

स्वर्ण जीतने वाले पाँच भारतीय छात्र हैं — कनिष्क जैन (पुणे, महाराष्ट्र), रिद्धेश अनंत बेंडाले (इंदौर, मध्य प्रदेश), ऋषित गर्ग (द्वारका, नई दिल्ली), श्रेष्ठ सुरैया (मुंबई, महाराष्ट्र) और स्वरित जोशी (अहमदाबाद, गुजरात)। यह कामयाबी IPhO में भारत की पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाती है — बीते एक दशक में हिस्सा लेने वाला हर भारतीय प्रतिभागी पदक जीतकर लौटा है।

भारत के ओलंपियाड कार्यक्रम की अगुवाई होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र (HBCSE) करता है, जो टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (TIFR) का राष्ट्रीय केंद्र है और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अधीन सहायता प्राप्त संस्थान है। देश में ओलंपियाड कार्यक्रम के नोडल केंद्र के तौर पर HBCSE अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाड समुदाय से भारत की कड़ी है। यह कई चरणों की कठिन चयन प्रक्रिया, दिशा-बोध शिविरों और गहन प्रशिक्षण के ज़रिये स्कूली स्तर के होनहार छात्रों को विज्ञान और गणित में तराशता है।

DAE के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजित कुमार मोहंती ने पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह नतीजा छात्रों की प्रतिभा, लगन और वैज्ञानिक सोच के साथ-साथ HBCSE-TIFR ओलंपियाड कार्यक्रम की प्रतिबद्धता का सबूत है। DAE ने टीम लीडर प्रो. अन्वेष मजूमदार (HBCSE-TIFR) और डॉ. लीना जोशी (सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई) तथा वैज्ञानिक पर्यवेक्षक प्रो. आनंद दासगुप्ता (IISER, कोलकाता) और सुश्री निशा केलकर (गोगटे-जोगलेकर कॉलेज, रत्नागिरी) को भी बधाई दी।

HBCSE के निदेशक प्रो. अर्णब भट्टाचार्य ने कहा कि विज्ञान और गणित ओलंपियाड में टीम इंडिया की अब आम हो चुकी कामयाबियाँ दशकों की धीरज भरी मेहनत और मार्गदर्शन का नतीजा हैं, जिन्हें परमाणु ऊर्जा विभाग का लगातार सहयोग मिलता रहा है।