भारत सरकार अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) लागू कर रही है। इसके आदर्श ग्राम घटक में गांवों के एकीकृत विकास पर जोर दिया गया है। इसका लक्ष्य केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में तालमेल बैठाकर तथा विकास की बड़ी कमियों को दूर करके प्रमुख सामाजिक-आर्थिक संकेतकों में पूर्ण उपलब्धि सुनिश्चित करना है। इस घटक के तहत देशभर में 47,328 गांव चुने गए हैं, जिनमें तेलंगाना के 435 गांव शामिल हैं। विकास की रूपरेखा में शिक्षा समेत 10 क्षेत्रों के 50 ऐसे सामाजिक-आर्थिक संकेतक शामिल हैं जिनकी निगरानी की जा सकती है। पहले आवश्यकता आकलन सर्वेक्षण से इन संकेतकों की आधार-स्थिति तय की जाती है। सर्वेक्षण में मिली कमियों को केंद्र और राज्य की योजनाओं के तालमेल से या पीएम-अजय से सहायता प्राप्त कार्यों के ज़रिए दूर किया जाता है। राज्य अपनी प्रगति पीएमएजीवाई पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट करते हैं। देशभर में योजना के तहत 3,28,131 विकास कार्यों और 1,10,51,213 लाभार्थियों की पहचान हुई है। इनमें 46,642 विकास कार्य पूरे हो चुके हैं और 47,59,399 लोगों को लाभ मिला है। तेलंगाना में शिक्षा क्षेत्र के 3,529 लाभार्थियों की पहचान हुई, जिनमें से 472 को लाभ मिल चुका है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने राज्यसभा में अनिल कुमार यादव मंडाडी को दिए लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। तीसरे पक्ष की जांच के संबंध में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पीएम-अजय के आदर्श ग्राम घटक के तहत ‘आदर्श ग्राम’ के स्व-घोषणा पत्र की पुष्टि करने का निर्देश दिया गया है।