संसद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। लोकसभा ने इसे 7 अगस्त 2026 और राज्यसभा ने 3 अगस्त 2026 को पारित किया। मूल कानून 2006 में अधिसूचित हुआ था और उसके लागू होने के 20 वर्ष पूरे हो चुके हैं। तकनीकी बदलाव, सूचना-प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों के विस्तार और बदलते कानूनी माहौल को देखते हुए यह संशोधन लाया गया। अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के वर्गीकरण के लिए संयंत्र या मशीनरी में निवेश तथा कारोबार के दोहरे मानदंड कानून में शामिल हैं। उद्यम पंजीकरण पोर्टल को डिजिटल, मुफ़्त और स्वैच्छिक पंजीकरण व्यवस्था के रूप में स्थायी दर्जा दिया गया है; पंजीकरण स्वैच्छिक ही रहेगा। देरी से भुगतान की समस्या पर खास ज़ोर दिया गया है। विवादों के ऑनलाइन निपटारे के साथ समय-सीमाएँ तय की गई हैं। पहली पेशी की तारीख से 90 दिन में सुलह पूरी करनी होगी, सुलह खत्म होने के 30 दिन में मामला मध्यस्थता के लिए भेजना होगा और दलीलें पूरी होने के 90 दिन में निर्णय देना होगा। किसी डिक्री, निर्णय या आदेश को रद्द कराने की अर्जी 6 महीने से अधिक लंबित रहने पर अदालत को सूक्ष्म या लघु उद्यम के आपूर्तिकर्ता को कम-से-कम 50% राशि देने का आदेश करना होगा। सुलह समझौते और मध्यस्थता के निर्णय भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूले जा सकेंगे। सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से खरीद के बिलों का भुगतान ट्रेड्स से करना होगा। राज्य कई सुविधा परिषदें बना सकेंगे और उनके लिए नियम तय कर सकेंगे। दंडात्मक प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाकर क्रमबद्ध नागरिक जुर्मानों से बदला गया है; गलत सूचना देने के पहले मामले में चेतावनी दी जाएगी।