24 जुलाई 2026 को प्रकाशित जानकारी के अनुसार, राजस्थान में अब राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े संगठनों के सदस्य सामुदायिक संपर्क समूहों में शामिल हो सकेंगे। राजस्थान पुलिस नियम, 2008 में पहले ऐसे सदस्यों के शामिल होने पर रोक थी। राज्य के गृह विभाग ने 19 जुलाई को जारी अधिसूचना के ज़रिए संबंधित उपबंध हटा दिया।
ये समूह कई तय कामों में पुलिस की सहायता करते हैं। इनमें खुफिया जानकारी जुटाना, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना, अपराधियों को पकड़ने में मदद करना, अपराध रोकना और लोगों को जागरूक करना शामिल है। राजस्थान में इन समूहों के कुल 75,265 सदस्य हैं।
सदस्यों की नियुक्ति पुलिस प्रशासन के हाथ में रहती है। जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस थाना या वृत्त अधिकारी की सिफ़ारिश पर सदस्यों को नियुक्त करते हैं। सदस्य स्थानीय निवासी और अच्छे चरित्र वाला होना चाहिए। समूह में सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देना भी ज़रूरी है। हर समूह में कम से कम दो महिलाएँ और अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदायों के कम से कम दो प्रतिनिधि होने चाहिए।
समूह का आकार उसके स्तर के अनुसार तय है। पुलिस थाना स्तर के सामुदायिक संपर्क समूह में 30 सदस्य होते हैं, जबकि पंचायत स्तर के समूह में पाँच सदस्य होते हैं।
19 जुलाई का बदलाव केवल सदस्यता की पात्रता से जुड़ा है। इससे राजनीतिक दलों और उनके संबद्ध संगठनों के सदस्यों पर लगी पुरानी रोक हट गई। समूहों के तय काम, पुलिस के अधीन नियुक्ति प्रक्रिया, स्थानीय निवास और चरित्र की शर्तें, प्रतिनिधित्व के नियम तथा सदस्यों की निर्धारित संख्या परीक्षा की दृष्टि से अन्य प्रमुख तथ्य हैं।
