24 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुखारेस्ट में भारत-रोमानिया व्यापार मंच को संबोधित किया। इस अवसर पर रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर दान भी उपस्थित थे। राष्ट्रपति मुर्मु ने रोमानिया की चार विशेषताओं पर ध्यान दिलाया—उसकी रणनीतिक स्थिति, कुशल मानव संसाधन, औद्योगिक क्षमताएँ और यूरोपीय संघ के साथ उसका जुड़ाव। उन्होंने कहा कि इन विशेषताओं के कारण रोमानिया व्यापक यूरोपीय बाज़ार का प्रवेश-द्वार बनता है। संबोधन में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को भी बड़े आर्थिक संदर्भ में रखा गया। इसके अनुसार, यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों का साझा बाज़ार बनाएगा, जिसका आर्थिक आकार करीब 25 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर होगा। राष्ट्रपति ने सहयोग के अनेक क्षेत्रों का भी उल्लेख किया। इनमें ऊर्जा सुरक्षा और हरित बदलाव के साथ रसायन तथा उर्वरक शामिल थे। तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में डिजिटल सार्वजनिक ढाँचा, सॉफ़्टवेयर, साइबर क्षेत्र और उन्नत तकनीक रखे गए। परिवहन और माल ढुलाई व्यवस्था को भी सहयोग का क्षेत्र बताया गया। स्वास्थ्य से जुड़े अवसरों में दवा उद्योग और स्वास्थ्य सेवाएँ शामिल थीं, जबकि कृषि के साथ खाद्य प्रसंस्करण को जोड़ा गया। इस प्रकार संबोधन में रोमानिया की यूरोपीय बाज़ार तक पहुँच, मुक्त व्यापार समझौते से बनने वाले बड़े साझा बाज़ार और अलग-अलग क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग की संभावनाओं को एक साथ रखा गया। परीक्षा की दृष्टि से रोमानिया की चार बताई गई विशेषताएँ, समझौते से जुड़ा बाज़ार और आर्थिक आकार तथा सहयोग के लिए चुने गए क्षेत्र मुख्य बिंदु हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट में भारत-रोमानिया व्यापार मंच को संबोधित किया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रोमानिया को व्यापक यूरोपीय बाज़ार का प्रवेश-द्वार बताया और इसे भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से बनने वाले बड़े बाज़ार से जोड़ा। उन्होंने ऊर्जा, उद्योग, तकनीक, परिवहन, स्वास्थ्य, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण में सहयोग के अवसर भी बताए।
मुख्य तथ्य
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 24 जुलाई 2026 को बुखारेस्ट में भारत-रोमानिया व्यापार मंच को संबोधित किया; इस अवसर पर रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर दान उपस्थित थे।
- रोमानिया की रणनीतिक स्थिति, कुशल मानव संसाधन, औद्योगिक क्षमताओं और यूरोपीय संघ से जुड़ाव को उसकी विशेषताओं के रूप में बताया गया।
- राष्ट्रपति ने कहा कि इन विशेषताओं के कारण रोमानिया व्यापक यूरोपीय बाज़ार का प्रवेश-द्वार बनता है।
- भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से लगभग 2 अरब लोगों का साझा बाज़ार बनने और उसका आर्थिक आकार करीब 25 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर होने की बात कही गई।
- सहयोग के क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा, हरित बदलाव, रसायन, उर्वरक, डिजिटल सार्वजनिक ढाँचा, सॉफ़्टवेयर, साइबर क्षेत्र और उन्नत तकनीक शामिल थे।
- परिवहन, माल ढुलाई व्यवस्था, दवा उद्योग, स्वास्थ्य सेवाएँ, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण को भी सहयोग के क्षेत्र के रूप में पहचाना गया।
6-अक्ष वर्गीकरण
अभ्यास प्रश्न MCQ
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भारत-रोमानिया व्यापार मंच में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संबोधन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रोमानिया की रणनीतिक स्थिति, कुशल मानव संसाधन, औद्योगिक क्षमताओं और यूरोपीय संघ से जुड़ाव को उसके व्यापक यूरोपीय बाज़ार का प्रवेश-द्वार बनने का आधार बताया गया। 2. संबोधन में केवल दवा उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं को ही सहयोग का क्षेत्र बताया गया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
कथन 1 सही है: संबोधन में रोमानिया की रणनीतिक स्थिति, कुशल मानव संसाधन, औद्योगिक क्षमताओं और यूरोपीय संघ से जुड़ाव को उसके प्रवेश-द्वार की भूमिका से जोड़ा गया। कथन 2 गलत है: सहयोग के अवसरों में ऊर्जा सुरक्षा, हरित बदलाव, रसायन, उर्वरक, डिजिटल सार्वजनिक ढाँचा, सॉफ़्टवेयर, साइबर क्षेत्र, उन्नत तकनीक, परिवहन, माल ढुलाई व्यवस्था, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण भी शामिल थे।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत-रोमानिया व्यापार मंच को कहाँ संबोधित किया?
उन्होंने बुखारेस्ट में मंच को संबोधित किया, जहाँ रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर दान भी उपस्थित थे।
रोमानिया को व्यापक यूरोपीय बाज़ार का प्रवेश-द्वार क्यों बताया गया?
संबोधन में उसकी रणनीतिक स्थिति, कुशल मानव संसाधन, औद्योगिक क्षमताओं और यूरोपीय संघ से जुड़ाव को इसका आधार बताया गया।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के साथ किस आकार के बाज़ार की बात कही गई?
इससे लगभग 2 अरब लोगों का साझा बाज़ार बनने और उसका आर्थिक आकार करीब 25 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर होने की बात कही गई।
संबोधन में सहयोग के कौन-से क्षेत्र बताए गए?
इनमें ऊर्जा सुरक्षा, हरित बदलाव, रसायन, उर्वरक, डिजिटल सार्वजनिक ढाँचा, सॉफ़्टवेयर, साइबर क्षेत्र, उन्नत तकनीक, परिवहन, माल ढुलाई व्यवस्था, दवा उद्योग, स्वास्थ्य सेवाएँ, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण शामिल थे।
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