पीएम पोषण के तहत बाल वाटिका से कक्षा 8 तक के पात्र बच्चों को स्कूल के हर कार्य दिवस पर एक समय का गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। तय पोषण और खाद्य मानकों के साथ स्थानीय मेनू, 5% लचीले घटक और पूरक पोषण की गुंजाइश भी रखी गई है।
मुख्य तथ्य
सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बाल वाटिका से कक्षा 8 तक के पात्र बच्चों को सभी कार्य दिवसों पर एक समय का गर्म पका हुआ भोजन मिलता है।
प्रतिदिन पोषण मानक प्राथमिक कक्षाओं के लिए 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन तथा उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन है।
खाद्य मानकों में खाद्यान्न, दाल, सब्जी, तेल और वसा की अलग-अलग मात्रा तय है; नमक और मसाले आवश्यकता के अनुसार दिए जाते हैं।
राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार मेनू तय कर सकते हैं और स्थानीय मोटे अनाज, सब्जियों तथा मसालों को प्राथमिकता दे सकते हैं।
आवर्ती बजट का 5% लचीला घटक स्कूल पोषण वाटिकाओं और चिन्हित जिलों में पूरक पोषण पहलों के लिए रखा गया है।
नीति आयोग द्वारा 2025-26 में कराए गए स्वतंत्र तीसरे पक्ष के मूल्यांकन में पोषण और सीखने के परिणामों पर सकारात्मक असर पाया गया।
शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, जबकि अधिकांश सरकारी स्कूल और स्कूल बोर्ड राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के अधीन काम करते हैं। इसलिए पीएम पोषण योजना इन्हीं के सहयोग से लागू की जाती है। सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की बाल वाटिका, यानी कक्षा 1 से ठीक पहले की कक्षा, तथा कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है। हर पात्र बच्चे को स्कूल के सभी कार्य दिवसों पर एक समय का गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्राथमिक कक्षा के प्रत्येक बच्चे के लिए प्रतिदिन 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन का मानक है। उच्च प्राथमिक कक्षा के लिए यह मानक 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रतिदिन खाद्यान्न की मात्रा क्रमशः 100 और 150 ग्राम, दालों की 20 और 30 ग्राम, सब्जियों की 50 और 75 ग्राम तथा तेल एवं वसा की 5 और 7.5 ग्राम तय है। नमक और मसाले आवश्यकता के अनुसार दिए जाते हैं।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक भोजन का मेनू बनाने और मोटे अनाज, सब्जियों तथा मसालों जैसी स्थानीय उपज की खरीद को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। कुल आवर्ती बजट का 5% लचीले घटक के रूप में स्कूल पोषण वाटिकाओं और चिन्हित जिलों में पूरक पोषण पहलों पर लगाया जा सकता है। कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्थानीय खान-पान, सांस्कृतिक पसंद, खाद्य उपलब्धता और आहार परंपराओं के अनुसार अतिरिक्त पोषण भी देते हैं। नीति आयोग ने 2025-26 में एक स्वतंत्र तीसरे पक्ष की संस्था से योजना का मूल्यांकन कराया। इसमें बच्चों के पोषण स्तर और सीखने के परिणामों पर सकारात्मक असर पाया गया। शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में लिखित उत्तर के ज़रिए यह जानकारी दी।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
नीचे दिए गए अभिकथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): पीएम पोषण के तहत हर पात्र बच्चे को स्कूल के सभी कार्य दिवसों पर एक समय का गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है।
कारण (R): कुल आवर्ती बजट का 5% लचीले घटक के रूप में रखा गया है, जिसका उपयोग स्कूल पोषण वाटिकाओं और चिन्हित जिलों में पूरक पोषण की पहल के लिए किया जा सकता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
व्याख्या · सही उत्तर B
अभिकथन और कारण दोनों सही हैं। योजना में हर पात्र बच्चे को स्कूल के सभी कार्य दिवसों पर एक समय का गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। आवर्ती बजट का 5% लचीले घटक के लिए भी तय है। लेकिन यह बजट प्रावधान हर कार्य दिवस पर भोजन दिए जाने की व्याख्या नहीं करता।