केंद्र सरकार ने बताया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 तथा नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 को लागू करने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मदद कैसे की जाती है। इसके लिए केंद्र प्रायोजित योजना के तहत नियमित निगरानी, समय पर वित्तीय सहायता और राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ तालमेल पर ज़ोर दिया जाता है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने लोकसभा में डॉ. मल्लु रवि के लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री की अध्यक्षता वाली केंद्रीय स्तर की समिति 29 मार्च 2006 को गठित की गई थी। यह समिति योजना के अमल और दोनों अधिनियमों के प्रावधानों की नियमित समीक्षा करती है। गठन के बाद से इसकी 29 बैठकें हो चुकी हैं। सबसे हाल की बैठक 8 जनवरी 2026 को हुई थी।

उत्तर के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मिले प्रस्तावों पर जल्द कार्रवाई की जाती है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और त्रिपुरा से मांगे गए स्पष्टीकरण मिल चुके हैं, इसलिए उनके प्रस्तावों पर आगे की कार्रवाई हो सकेगी।

तेलंगाना ने 2026-27 के लिए वित्तीय सहायता का प्रस्ताव दिया था। इसमें ऐसे अंतरजातीय विवाहित जोड़ों को प्रोत्साहन राशि देना भी शामिल है, जिनमें पति या पत्नी में से एक अनुसूचित जाति समुदाय से हो। योजना के दिशानिर्देशों के तहत केंद्र ने राज्य को 30.52 करोड़ रुपए जारी किए।

योजना बिना रुकावट चलती रहे, इसके लिए मंत्रालय ने प्रस्ताव मिलने से पहले ही अप्रैल 2026 में एसएनए-स्पर्श व्यवस्था पर मूल मंजूरी के ज़रिए 128.4327 करोड़ रुपए की सांकेतिक राशि जारी की थी। बाद में तय शर्तें पूरी करने वाले पात्र राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय सहायता की दूसरी किस्त भी जारी कर दी गई। सरकार का घोषित उद्देश्य समय पर सहायता, मज़बूत संस्थागत निगरानी और मिलकर काम करने के ज़रिए अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के अधिकारों, गरिमा और कल्याण की रक्षा करना है।