भारत की अध्यक्षता में आयोजित 14वीं ब्रिक्स विज्ञान मंत्रिस्तरीय बैठक के समापन सत्र में डॉ. जितेंद्र सिंह ने चेन्नई घोषणापत्र को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की घोषणा की। घोषणापत्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में प्रभावी, लचीले और भविष्य के लिए तैयार सहयोगी ढांचे के प्रति ब्रिक्स की प्रतिबद्धता दोहराता है। इसके केंद्र में जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण है। नवाचार को सतत विकास, समावेशी वृद्धि, जनकल्याण और बेहतर जीवन-गुणवत्ता से जोड़ा गया है। इसमें 14 विषयगत कार्य समूहों, ब्रिक्स युवा वैज्ञानिक मंच के 11 संस्करणों, युवा नवप्रवर्तक पुरस्कार के 9 संस्करणों और ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार ढांचा कार्यक्रम के 9 आह्वानों के माध्यम से चले सहयोग का उल्लेख है। साझा अनुसंधान अवसंरचना और व्यापक विज्ञान परियोजनाएं सहयोग का प्रमुख क्षेत्र हैं। ब्रिक्स वैश्विक उन्नत अनुसंधान अवसंरचना संजाल को सक्रिय करने की प्रगति का उद्देश्य अनुसंधान सुविधाओं तक बेहतर पहुंच, संयुक्त शोध, शोधकर्ताओं की गतिशीलता और क्षमता निर्माण बढ़ाना है। प्रस्तावित ब्रिक्स विज्ञान एवं अनुसंधान भंडार एक डिजिटल सार्वजनिक संसाधन होगा, जो राष्ट्रीय नियमों और डेटा प्रशासन की आवश्यकताओं के अनुरूप संस्थानों, शोधकर्ताओं, शोध निष्कर्षों, आंकड़ा-संग्रहों, अवसंरचना और सहयोग के अवसरों का मानचित्रण करेगा। घोषणापत्र नव उद्यम संवर्धन केंद्रों, गति-वर्धक संस्थाओं और आरंभिक चरण के निवेशकों के बीच मजबूत भागीदारी तथा युवा शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों के लिए अधिक अवसरों का भी समर्थन करता है। सहयोग के क्षेत्रों में उच्च प्रदर्शन संगणना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, मानव स्वास्थ्य, सामग्री विज्ञान, नैनो प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, महासागर एवं ध्रुवीय विज्ञान, आपदा प्रबंधन और क्वांटम प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। मंत्रियों ने 2026-2027 की गतिविधियों का कैलेंडर मंजूर किया। अगली मंत्रिस्तरीय बैठक 2027 में चीन की अध्यक्षता में निर्धारित है।