80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में समावेशी विकास को अहम बताया। उन्होंने कहा कि अंत्योदय की भावना के साथ विकास का लाभ हर व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। संबोधन में कई जनकल्याण उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएँ हैं। 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ़्त राशन की व्यवस्था की गई है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 60 करोड़ लोगों को हर वर्ष ₹5 लाख तक की मुफ़्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। किसान सम्मान निधि और किसान क्रेडिट कार्ड से खेती, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन तथा मधुमक्खी पालन से जुड़े लोगों को सहारा मिला है। डिजिटल ढाँचे को भी सुविधाएँ सब तक पहुँचाने का माध्यम बताया गया। गाँवों की छोटी दुकानों और रेहड़ी-पटरी पर भी डिजिटल भुगतान हो रहा है। दुनिया में तुरंत होने वाले डिजिटल लेन-देन में आधे से अधिक भारत में होते हैं। संबोधन के अनुसार, तकनीक के इस्तेमाल से सरकार ने जनकल्याण की सुविधाएँ पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुँचाई हैं। इन कदमों को प्रतिष्ठा और अवसर की समानता, व्यक्ति की गरिमा तथा जनभागीदारी जैसे संवैधानिक आदर्शों से जोड़ा गया। मुख्य संदेश यह रहा कि विकसित भारत की ओर बढ़ते समय जनकल्याण, बैंकिंग तक पहुँच, पारदर्शी सेवा और नागरिक भागीदारी को साथ लेकर चलना होगा।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मु ने कल्याण और डिजिटल समावेशन की उपलब्धियाँ बताईं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या के संबोधन में जनकल्याण, बैंकिंग तक पहुँच और डिजिटल भुगतान की उपलब्धियाँ बताईं। उन्होंने इन्हें पारदर्शी सेवा, जनभागीदारी और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा।
मुख्य तथ्य
- संबोधन में समावेशी विकास और अंतिम व्यक्ति तक जनकल्याण पहुँचाने को 2047 के विकसित भारत लक्ष्य का आधार बताया गया।
- 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है और 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ़्त राशन की व्यवस्था है।
- प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएँ हैं।
- आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 60 करोड़ लोगों को हर वर्ष ₹5 लाख तक की मुफ़्त चिकित्सा सुविधा मिलती है।
- दुनिया में तुरंत होने वाले डिजिटल लेन-देन में आधे से अधिक भारत में होते हैं और डिजिटल भुगतान गाँवों की छोटी दुकानों तथा रेहड़ी-पटरी तक पहुँचा है।
- संबोधन के अनुसार, तकनीक ने जनकल्याण की सुविधाएँ पारदर्शी ढंग से लोगों तक पहुँचाने में मदद की है।
6-अक्ष वर्गीकरण
अभ्यास प्रश्न MCQ
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राष्ट्रपति के संबोधन में बताई गई जनकल्याण और डिजिटल उपलब्धियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दुनिया में तुरंत होने वाले डिजिटल लेन-देन में आधे से अधिक भारत में नहीं होते हैं। 2. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 60 करोड़ लोगों को हर वर्ष ₹5 लाख तक की मुफ़्त चिकित्सा सुविधा मिलती है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा सही है?
कथन 1 गलत है। संबोधन के अनुसार, दुनिया में तुरंत होने वाले डिजिटल लेन-देन में आधे से अधिक भारत में होते हैं। कथन 2 सही है। इस योजना के तहत 60 करोड़ लोगों को हर वर्ष ₹5 लाख तक की मुफ़्त चिकित्सा सुविधा मिलती है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संबोधन में बैंकिंग तक पहुँच की कौन-सी उपलब्धि बताई गई?
प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएँ हैं।
राष्ट्रपति ने जनकल्याण की कौन-सी कवरेज बताई?
उन्होंने 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ़्त राशन और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 60 करोड़ लोगों के लिए हर वर्ष ₹5 लाख तक की मुफ़्त चिकित्सा सुविधा का उल्लेख किया।
भारत में डिजिटल लेन-देन के बारे में क्या बताया गया?
संबोधन में कहा गया कि दुनिया में तुरंत होने वाले डिजिटल लेन-देन में आधे से अधिक भारत में होते हैं और गाँवों की छोटी दुकानों तथा रेहड़ी-पटरी पर भी डिजिटल भुगतान हो रहा है।
तकनीक को शासन से किस तरह जोड़ा गया?
संबोधन के अनुसार, तकनीक ने सरकार को जनकल्याण की सुविधाएँ पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुँचाने में मदद की है।
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