पत्र सूचना कार्यालय ने 5 सितंबर 2026 को जारी पृष्ठभूमि लेख में आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना के पाँचवें चरण की जानकारी दी। सरकार ने बाहरी आर्थिक व्यवधानों से प्रभावित व्यवसायों की मदद के लिए 5 मई 2026 को इस योजना को मंज़ूरी दी थी। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी इसे लागू करती है। योजना का लक्ष्य 2.55 लाख करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराना है।
इसमें पात्र सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, इस श्रेणी से बाहर के पात्र व्यावसायिक उधारकर्ता और अनुसूचित यात्री एयरलाइन कंपनियाँ शामिल हैं। सरकारी गारंटी से ऋणदाता संस्थानों का ऋण जोखिम घटता है और वे व्यवसायों को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी दे सकते हैं। इससे उद्यमों को कम समय में पूरे किए जाने वाले वित्तीय दायित्व निभाने, रोज़गार बनाए रखने और उत्पादन जारी रखने में मदद मिलती है। आपूर्ति शृंखला या कारोबार में व्यवधान आने पर यह सहायता उपयोगी होती है।
मूल योजना 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत शुरू हुई थी। उस समय कोरोना महामारी से पैदा हुए वित्तीय संकट से व्यवसायों को राहत देना इसका उद्देश्य था। बाद के चरणों में स्वास्थ्य सेवा और नागरिक उड्डयन सहित अलग-अलग क्षेत्रों तक सहायता बढ़ाई गई। चरण 1.0 से 4.0 तक 3.68 लाख करोड़ रुपये की 1.19 करोड़ गारंटियाँ जारी हुईं। ये चरण 31 मार्च 2023 को समाप्त हुए।
चरण 5.0 की अवधि 31 मार्च 2027 तक है। यदि इससे पहले 2.55 लाख करोड़ रुपये की गारंटियाँ जारी हो जाती हैं, तो योजना उसी समय समाप्त हो जाएगी। 20 अगस्त 2026 तक 2,50,024 करोड़ रुपये की 6,73,979 गारंटियाँ जारी हुई थीं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की हिस्सेदारी गारंटियों की संख्या में 97.3% और गारंटी राशि में 80.79% थी। योजना की अधिकतम ऋण सीमा और किसी खास तारीख तक की प्रगति को अलग-अलग समझना ज़रूरी है।
