केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित प्रस्तावित कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना का उद्देश्य देश में ऐसा कंटेनर विनिर्माण तंत्र तैयार करना है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके। पांच वर्षों के लिए ₹10,000 करोड़ के परिव्यय वाली इस योजना में नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना, मौजूदा इकाइयों के विस्तार, घरेलू निर्माण को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए परिचालन सहायता, परीक्षण ढांचे, कौशल विकास और क्षमता निर्माण को सहायता दी जाएगी। इसका लक्ष्य घरेलू वार्षिक क्षमता को मौजूदा स्तर से लगभग 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख बीस-फुट समतुल्य इकाई करना है। इससे करीब ₹80,000 करोड़ का बाज़ार बनने की उम्मीद है। यह योजना भारत की एक बड़ी माल परिवहन संबंधी कमज़ोरी का समाधान करना चाहती है। घरेलू मांग और कंटेनरों को दोबारा सही स्थान पर पहुंचाने के लिए भारत हर साल लगभग 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है। इस निर्भरता के कारण कंटेनरों की उपलब्धता वैश्विक बाज़ार के उतार-चढ़ाव, भाड़ा दरों की अस्थिरता और आपूर्ति-श्रृंखला में रुकावटों से प्रभावित होती है। घरेलू उत्पादन और पूरी निर्माण शृंखला में निवेश बढ़ाकर योजना आयात पर निर्भरता घटाना और आपूर्ति-श्रृंखला को अधिक मज़बूत बनाना चाहती है। शिपिंग कंटेनर मानकीकृत स्टील के मालवाहक डिब्बे होते हैं, जिनसे सामान को रास्ते में उतारे या दोबारा पैक किए बिना जहाज़, रेल और सड़क मार्ग से ले जाया जाता है। प्रचलित 20-फुट और 40-फुट कंटेनरों की क्षमता बीस-फुट समतुल्य इकाइयों में मापी जाती है। योजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोज़गार पैदा होने की संभावना है। इससे कॉर्नर कास्टिंग, लकड़ी के फ्रेम और कॉर्टेन स्टील जैसे जुड़े उद्योगों को भी बढ़ावा मिल सकता है। यह मेक इन इंडिया, मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 और बहु-माध्यम माल परिवहन विकास की पहलों को भी आगे बढ़ाती है।
कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना का लक्ष्य 7.5 लाख बीस-फुट समतुल्य इकाइयों की वार्षिक क्षमता
प्रस्तावित योजना वित्तीय और संस्थागत सहायता से घरेलू कंटेनर क्षमता को सालाना 7.5 लाख बीस-फुट समतुल्य इकाइयों तक ले जाना चाहती है। इसका लक्ष्य आयात निर्भरता घटाना, आपूर्ति-श्रृंखला को मज़बूत करना तथा रोज़गार और जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देना है।
मुख्य तथ्य
- कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में हुई और इसके लिए पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का परिव्यय रखा गया है।
- योजना का लक्ष्य घरेलू वार्षिक विनिर्माण क्षमता को मौजूदा स्तर से लगभग 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख बीस-फुट समतुल्य इकाई करना है।
- घरेलू मांग और कंटेनरों को दोबारा सही स्थान पर पहुंचाने के लिए भारत हर साल लगभग 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है।
- सहायता में नई इकाइयां, मौजूदा इकाइयों का विस्तार, परिचालन सहायता, परीक्षण ढांचा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण शामिल हैं।
- योजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोज़गार पैदा हो सकते हैं।
6-अक्ष वर्गीकरण
अभ्यास प्रश्न MCQ
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कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना में दी जाने वाली सहायता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. योजना केवल नई विनिर्माण इकाइयों की सहायता करती है और मौजूदा इकाइयों के विस्तार को शामिल नहीं करती। 2. इसमें परीक्षण ढांचे, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए सहायता दी जाती है। ऊपर दिए गए कथनों के आधार पर सही उत्तर चुनिए।
कथन 1 गलत है, क्योंकि योजना नई विनिर्माण इकाइयों के साथ मौजूदा इकाइयों के विस्तार की भी सहायता करती है। कथन 2 सही है। परीक्षण ढांचा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण योजना में शामिल सहायता उपाय हैं।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
योजना में विनिर्माण क्षमता का लक्ष्य क्या है?
लक्ष्य घरेलू वार्षिक क्षमता को मौजूदा स्तर से लगभग 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख बीस-फुट समतुल्य इकाई करना है।
योजना का वित्तीय परिव्यय कितना है?
प्रस्तावित योजना के लिए पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का परिव्यय रखा गया है।
भारत को घरेलू कंटेनर विनिर्माण की ज़रूरत क्यों है?
भारत हर साल लगभग 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है, इसलिए उनकी उपलब्धता वैश्विक उतार-चढ़ाव, भाड़ा दरों की अस्थिरता और आपूर्ति-श्रृंखला की रुकावटों से प्रभावित हो सकती है।
योजना में किस तरह की सहायता दी जाएगी?
इसमें नई इकाइयों, मौजूदा इकाइयों के विस्तार, घरेलू निर्माण को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए परिचालन सहायता, परीक्षण ढांचे, कौशल विकास और क्षमता निर्माण को सहायता शामिल है।
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