केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 20 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता की। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल के मुख्यमंत्री, पुदुचेरी तथा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के उप-राज्यपाल, लक्षद्वीप के प्रशासक और तेलंगाना के उप-मुख्यमंत्री के साथ केंद्र व राज्य के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

शाह ने कहा कि दक्षिण भारत की विकास यात्रा तीन स्तंभों — उच्च साक्षरता दर, प्रशिक्षित जनशक्ति और गहरे समुद्र के उपयोग की तकनीकी विशेषज्ञता — पर टिकी है और आगे की प्रगति पानी पर निर्भर है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 80वें स्वतंत्रता दिवस वाले संदेश का स्मरण कराया कि पिछले पाँच-सात दशकों में जो नहीं हुआ, उसे अगले पाँच-सात साल में करना होगा; इसके लिए हर राज्य को योगदान देना होगा।

उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषद संवैधानिक व्यवस्था होते हुए औपचारिकता बन चुकी थी, जिसे 2014 के बाद सार्थक मंच बनाया गया। 2004–2014 में प्रतिवर्ष औसतन ढाई बैठकें होती थीं; अब करीब छह बैठकें प्रति वर्ष होती हैं। 2014 से 70 बैठकों में 1869 मुद्दों में से 1445 यानी लगभग 80% का समाधान निकला, जिनमें करीब 60 साल से लंबित कई मुद्दे भी शामिल हैं।

जल पर उन्होंने कहा कि उत्तर के नदी-बंटवारा विवाद पाँच महीने पहले निपटाए गए और कश्मीर से उत्तर प्रदेश तक विवादहीन स्थिति बनी; दक्षिण में जल शक्ति मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अंतर-राज्य परिषद की राज्यों के साथ संयुक्त बैठक से नए सिरे से काम होना चाहिए। दक्षिणी राज्यों ने संवाद से जल विवाद हल करने पर सहमति जताई; आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने परिसंपत्ति-देनदारी का समाधान गृह मंत्रालय के परामर्श से करने पर सहमति दी। उन्होंने ब्रह्मपुत्र से कावेरी-गोदावरी जुड़ाव को अगले 100 साल तक पानी की कमी न होने से जोड़ा, महिलाओं-बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों पर ज़ोर दिया, स्कूल ड्रॉपआउट अनुपात 9.5 से 3% से नीचे लाने की बात कही, कुपोषण और बौनेपन पर चेताया, तथा नशामुक्त भारत का तीन साल का गृह मंत्रालय रोडमैप बताया।