भारत ने समुद्री और तटीय निगरानी व पूर्वानुमान बेहतर करने के लिए राष्ट्रीय महासागर निगरानी नेटवर्क को मजबूत किया है। समुद्री धाराओं और प्राणी-प्लवक जैवभार की निगरानी के लिए उपसतह में 19 मूरिंग लगाई गई हैं। इनमें 16 मुख्य भूमि के विशेष आर्थिक क्षेत्र में और 3 भूमध्यरेखीय हिंद महासागर में हैं। भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली में 17 ब्रॉडबैंड भूकंपीय स्टेशन, गहरे समुद्र में 7 सुनामी बुया, 36 तटीय ज्वार गेज, 35 वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणाली रिसीवर और तीव्र गति त्वरणमापी शामिल हैं।

भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र तटीय निगरानी के लिए 17 दिशात्मक तरंग-मापक बुया, 20 ध्वनिक डॉप्लर धारा मापक, 32 स्वचालित मौसम स्टेशन, 2 जल-गुणवत्ता बुया और 50 ज्वार गेज का नेटवर्क चलाता है। केंद्र ने 2014-2025 में 302 आर्गो प्रोफ़ाइलिंग फ्लोट, 12 गहरे समुद्र के ग्लाइडर अभियान, 45 बहती बुया और 64 तरंग मापक भी तैनात किए।

हाल के विस्तार में 14 अतिरिक्त ज्वारमापी यंत्र और उनके साथ 15 वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणाली रिसीवर लगाए गए। उत्तरी भारतीय तटीय जल पर दक्षिणी महासागर की लहरों का पूर्वानुमान बेहतर करने के लिए मॉरीशस के तट पर एक दिशात्मक तरंग-मापक बुया भी लगाई गई है। उपकरणों की तैनाती और रखरखाव के लिए मानसून से पहले और बाद में नियमित अनुसंधान पोत यात्राएँ की जाती हैं।

वास्तविक समय में मिले आँकड़ों की गुणवत्ता जाँचकर उन्हें संख्यात्मक मॉडलों में शामिल किया जाता है। इससे मानसून, चक्रवात, समुद्री स्थिति, लहरों और तटीय परिस्थितियों के पूर्वानुमान की गलती घटती है। 2014 की तुलना में तरंग पूर्वानुमान की सटीकता लगभग 43 प्रतिशत सुधरी है और पाँच दिन की पूर्वानुमान अवधि में यह सुधार बना रहता है। तटीय पूर्वानुमान प्रणाली लगभग 70 प्रतिशत सटीकता तक पहुँची है। सुनामी पैदा करने वाले भूकंप के बाद निर्धारित 10 मिनट के भीतर चेतावनी भी जारी की जा सकती है।