प्रकाशित: 30 अगस्त 2026PIBअर्थव्यवस्था
आईएफएमएस: एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली अब 14 करोड़ से ज़्यादा आधार-लिंक्ड खरीदारों और सालाना करीब 2 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी को कवर करती है
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग की एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) भारत में उर्वरक प्रबंधन की डिजिटल रीढ़ के रूप में एक नए दौर में पहुँच गई है। नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) ने उर्वरक विभाग के लिए इसे विकसित किया और तकनीकी सहारा दिया। यह प्रणाली उत्पादन, आयात, आवागमन, स्टॉक उपलब्धता, खुदरा बिक्री और सब्सिडी प्रोसेसिंग को जोड़ती है।
राष्ट्रीय स्तर पर यह 14 करोड़ से ज़्यादा आधार-लिंक्ड उर्वरक खरीदारों, 2.5 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं और सालाना करीब 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री को कवर करती है; साथ ही सालाना करीब 2 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी के प्रबंधन में मदद करती है। विभाग ने आईएफएमएस को सिर्फ़ लेन-देन दर्ज करने से आगे बढ़ाकर एकीकृत निगरानी और फ़ैसला-सहायता मंच बनाया है। नए डैशबोर्ड और विश्लेषण उपकरण उत्पादन, आयात, प्रेषण, आवागमन, स्टॉक और खुदरा बिक्री की एक साथ जानकारी राष्ट्रीय, राज्य, ज़िला व खुदरा विक्रेता स्तर पर देते हैं।
महत्वपूर्ण कदम रहा है आईएफएमएस का किसान, भूमि व फ़सल डेटाबेस से जुड़ाव। हरियाणा की मेरी फ़सल मेरा ब्यौरा (एमएफएमबी) और एग्रीस्टैक से जोड़ने के काम ने उर्वरक खरीदारों को किसान और भूमि अभिलेखों से मिलाने में मदद की। उर्वरक बिक्री फ़्रेमवर्क (एफएफएस) मोबाइल ऐप आधारित बुकिंग को आईएफएमएस पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) व्यवस्था से जोड़ता है: किसान एग्रीस्टैक आईडी पर भूमि-स्वामित्व सत्यापन के बाद उर्वरक बुक करता है, क्यूआर बुकिंग बनती है और पीओएस पर बुकिंग व खरीदी मात्रा का मिलान होता है। फ़्रेमवर्क व्यापक लागू से पहले चरणबद्ध रूप से लागू हो रहा है।
उर्वरक आवागमन की डिजिटल निगरानी व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (वीएलटीएस) से मज़बूत हुई है, जो प्रेषण को वाहन-स्थान डेटा से जोड़कर खेपों की निगरानी और देरी या असामान्य पैटर्न की पहचान में मदद करता है। सब्सिडी भुगतान पीओएस पर दर्ज असल बिक्री से जुड़ा है। 1 जनवरी 2026 को सब्सिडी बिलों के इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसिंग और पीएफएमएस/ई-बिल प्रक्रियाओं से जोड़ने का काम आगे बढ़ा, जिससे मैनुअल हस्तक्षेप घटा और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेसिंग सुधरी। डीबीटी बिलों के लिए बेतरतीब सत्यापन और अतिरिक्त विश्लेषणात्मक जाँच भी शुरू की जा रही हैं।
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आईएफएमएस उर्वरक विभाग के लिए नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) द्वारा विकसित है और तकनीकी रूप से समर्थित है।
2. राष्ट्रीय स्तर पर आईएफएमएस 14 करोड़ से ज़्यादा आधार-लिंक्ड उर्वरक खरीदारों को कवर करता है और सालाना करीब 2 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी के प्रबंधन में मदद करता है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या · सही उत्तर Cदोनों कथन सही हैं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार एनआईसी ने उर्वरक विभाग के लिए आईएफएमएस विकसित किया और तकनीकी सहारा दिया; राष्ट्रीय व्यवस्था 14 करोड़ से ज़्यादा आधार-लिंक्ड उर्वरक खरीदारों को कवर करती है और सालाना करीब 2 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी प्रबंधन में मदद करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आईएफएमएस किसने विकसित किया और किस विभाग के लिए?
नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग के लिए आईएफएमएस विकसित किया और तकनीकी सहारा दिया।
आईएफएमएस खरीदारों, विक्रेताओं, बिक्री और सब्सिडी के किस पैमाने को कवर करता है?
14 करोड़ से ज़्यादा आधार-लिंक्ड उर्वरक खरीदार, 2.5 लाख से अधिक खुदरा विक्रेता, सालाना करीब 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री, तथा सालाना करीब 2 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी प्रबंधन में मदद।
उर्वरक बिक्री फ़्रेमवर्क (एफएफएस) क्या है?
मोबाइल ऐप आधारित उर्वरक बुकिंग—एग्रीस्टैक आईडी, भूमि-स्वामित्व सत्यापन और क्यूआर बुकिंग—को मौजूदा आईएफएमएस पीओएस व्यवस्था से चरणबद्ध रूप से जोड़ने की पहल।
व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (वीएलटीएस) क्या करता है?
प्रेषण जानकारी को वाहन-स्थान डेटा से जोड़कर परिवहन में उर्वरक खेपों की निगरानी करता है और देरी तथा असामान्य आवागमन पैटर्न पहचानने में मदद करता है; इसे आईएफएमएस की गुड्स-इन-ट्रांजिट, प्रेषण व स्टॉक जानकारी के साथ जोड़ा जाता है।
1 जनवरी 2026 को सब्सिडी प्रोसेसिंग में क्या आगे बढ़ा?
सब्सिडी बिलों के इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसिंग और पीएफएमएस/ई-बिल वित्तीय प्रक्रियाओं से जोड़ने की दिशा में आगे काम, जिससे मैनुअल हस्तक्षेप घटा और दावों-भुगतानों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी सुधरी।