विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार शाम ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फ़ोन पर बात की। बातचीत में जयशंकर ने क्षेत्र में जारी संघर्ष को लेकर भारत की गहरी चिंता बताई। उन्होंने साफ़ कहा कि वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर किसी भी परिस्थिति में हमला नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा हमला किसी भी पक्ष की ओर से हो, भारत उसकी निंदा करता है। भारत के रुख़ में दो बातें स्पष्ट हैं—हमले रोकने की अपील हर परिस्थिति के लिए है और निंदा किसी एक पक्ष तक सीमित नहीं है। जयशंकर ने बताया कि उन्हें मौजूदा घटनाक्रम पर ईरान के दृष्टिकोण और चल रही बातचीत की जानकारी दी गई। उन्होंने दोहराया कि भारत बातचीत और कूटनीति के पक्ष में बना हुआ है। इस तरह भारत ने क्षेत्रीय संघर्ष पर चिंता जताने के साथ वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर विशेष ज़ोर दिया तथा बातचीत और कूटनीति को अपने रुख़ का प्रमुख आधार बताया। परीक्षा की दृष्टि से इस संवाद को चार बिंदुओं में समझा जा सकता है—दोनों विदेश मंत्रियों के बीच फ़ोन पर बातचीत, क्षेत्रीय संघर्ष पर भारत की गहरी चिंता, वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हर परिस्थिति में हमले रोकने की अपील, और बातचीत व कूटनीति के प्रति भारत का समर्थन। इस बातचीत की जानकारी जयशंकर ने X पर एक पोस्ट में दी। इसमें यह भी दर्ज था कि ईरानी पक्ष ने मौजूदा घटनाक्रम और जारी बातचीत पर अपना दृष्टिकोण साझा किया।