शिक्षा मंत्रालय डिजिटल शिक्षा और उससे जुड़ी सुविधाओं का विस्तार ₹100 करोड़ के अलग स्वतंत्र आवंटन से नहीं, बल्कि समग्र शिक्षा के तहत करता है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं तथा स्मार्ट कक्षाओं के लिए राज्यों की ज़रूरत के अनुसार वार्षिक कार्य योजना और बजट में धन दिया जाता है। मंत्रालय ग्रामीण, दूर-दराज और आदिवासी इलाकों के सरकारी स्कूलों में भी पीएम ई-विद्या और दीक्षा जैसी पहलें चला रहा है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत पीएम ई-विद्या की शुरुआत 17 मई 2020 को हुई थी। यह देशभर में कई तरीकों से शिक्षा की पहुँच बढ़ाने के लिए डिजिटल, ऑनलाइन और प्रसारण आधारित व्यवस्थाओं को एक साथ जोड़ती है। इसके प्रमुख घटकों में 200 डीटीएच टेलीविजन चैनल और 400 रेडियो चैनल शामिल हैं, जिनसे कक्षा 1 से 12 तक भारतीय भाषाओं में पूरक शिक्षा दी जा सकती है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इन पहलों के उपयोग, निगरानी और असर के आकलन के लिए एनसीईआरटी के साथ काम करते हैं।

प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर योजना इंजीनियरिंग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के 13 विषयगत क्षेत्रों में भारतीय मूल के उन शोधकर्ताओं और पेशेवरों को सहायता देती है, जिन्हें भारत से बाहर काम करने का अनुभव है। पीएचडी के बाद के अनुभव के आधार पर इसकी 3 श्रेणियाँ हैं—युवा अनुसंधान अध्येता, वरिष्ठ अध्येता और रिसर्च चेयर।

केंद्रीय बजट 2026–27 में मुंबई के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज़ के सहयोग से 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी सामग्री निर्माण प्रयोगशालाएँ स्थापित करने की घोषणा की गई। इनका उद्देश्य छात्रों को एनिमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग और कॉमिक्स में उद्योग की ज़रूरत के अनुरूप कौशल देना है। सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 275 तकनीकी संस्थानों में गुणवत्ता, समता और संचालन सुधारने के लिए ₹4,200 करोड़ की एमईआरआईटीई योजना भी शुरू की है।