सरकार ने मिट्टी के क्षरण को रोकने और उर्वरकों, खादों तथा खरपतवारनाशकों के समझदारी से उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय बताए हैं। वर्ष 2014-15 से लागू मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना में मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाते हैं। इनमें मिट्टी की पोषक स्थिति दर्ज होती है और उसी आधार पर किसानों को हर फ़सल के लिए उर्वरक संबंधी सुझाव मिलते हैं। इसका उद्देश्य संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, अधिक फ़सल उत्पादकता, खेती की कम लागत और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है। अब तक 26.09 करोड़ कार्ड जारी हो चुके हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 नवंबर 2024 को राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन को मंज़ूरी दी। यह मिशन खेत में उपलब्ध साधनों से रसायन-मुक्त, प्रकृति आधारित खेती को बढ़ावा देता है। इसमें 23.13 लाख किसानों का पंजीकरण हुआ है और 11.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र शामिल किया गया है। वर्ष 1985 से एकीकृत कीट प्रबंधन को समग्र फ़सल उत्पादन कार्यक्रम में पौध संरक्षण का मुख्य आधार माना गया है। इसमें खेती संबंधी, यांत्रिक, जैविक और ज़रूरत के अनुसार रासायनिक नियंत्रण को जोड़ा जाता है। खरीफ़ 2026 में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर विशेष जागरूकता तथा खेत बचाओ अभियान चलाए। कुल 2,94,554 कार्यक्रमों से 1,36,73,465 किसानों को लाभ मिला। इनमें प्राकृतिक और जैविक खेती, जैविक साधनों तथा वैकल्पिक उर्वरकों की जानकारी भी दी गई। वर्ष 2015-16 से लागू परंपरागत कृषि विकास योजना उत्पादन, प्रसंस्करण, प्रमाणन और विपणन में सहयोग देती है। इससे 18.93 लाख हेक्टेयर भूमि जैविक खेती के अंतर्गत आई और 33.63 लाख किसानों को लाभ मिला। पूर्वोत्तर क्षेत्र की अलग परियोजना से 2.36 लाख हेक्टेयर भूमि और 2.74 लाख किसान जुड़े। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एकीकृत खरपतवार प्रबंधन को भी बढ़ावा देती है और किसानों को सलाह देने से पहले मिट्टी तथा खाद्य शृंखला में खरपतवारनाशक अवशेषों का विश्लेषण करती है।
सरकार ने मृदा स्वास्थ्य, प्राकृतिक खेती और जैविक खेती के उपाय बताए
सरकार मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक और जैविक खेती, एकीकृत कीट व खरपतवार प्रबंधन तथा किसान जागरूकता को जोड़कर मृदा स्वास्थ्य सुधारने और खेती के साधनों का समझदारी से उपयोग बढ़ाने पर काम कर रही है। इन उपायों में 26.09 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड और प्राकृतिक व जैविक खेती की अलग योजनाएँ शामिल हैं।
मुख्य तथ्य
- मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना वर्ष 2014-15 से लागू है और अब तक 26.09 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए हैं।
- राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन को 25 नवंबर 2024 को मंजूरी मिली; इसमें 23.13 लाख किसान पंजीकृत हैं और 11.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है।
- वर्ष 1985 से एकीकृत कीट प्रबंधन को समग्र फसल उत्पादन कार्यक्रम में पौध संरक्षण का मुख्य आधार माना गया है।
- खरीफ 2026 के जागरूकता और खेत बचाओ अभियानों के 2,94,554 कार्यक्रमों से 1,36,73,465 किसानों को लाभ मिला।
- परंपरागत कृषि विकास योजना से 18.93 लाख हेक्टेयर भूमि जैविक खेती के अंतर्गत आई और 33.63 लाख किसानों को लाभ मिला।
- पूर्वोत्तर क्षेत्र की जैविक मूल्य शृंखला परियोजना से 2.36 लाख हेक्टेयर भूमि और 2.74 लाख किसान जुड़े हैं।
6-अक्ष वर्गीकरण
अभ्यास प्रश्न MCQ
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना वर्ष 2014-15 से लागू है और इसके कार्डों में मिट्टी की पोषक स्थिति का विवरण होता है। 2. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन को 25 नवंबर 2023 को मंज़ूरी दी। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा सही है?
कथन 1 सही है। यह योजना वर्ष 2014-15 से लागू है और इसके कार्डों में मिट्टी की पोषक स्थिति दर्ज होती है, जिसके आधार पर हर फ़सल के लिए उर्वरक संबंधी सुझाव दिए जाते हैं। कथन 2 गलत है, क्योंकि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन को 25 नवंबर 2024 को मंज़ूरी दी थी, 2023 में नहीं।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मृदा स्वास्थ्य कार्ड में क्या जानकारी मिलती है?
इसमें मिट्टी की पोषक स्थिति दर्ज होती है और उसी आधार पर हर फसल के लिए उर्वरक संबंधी सुझाव दिए जाते हैं।
राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन किस तरह की खेती को बढ़ावा देता है?
यह खेत में उपलब्ध साधनों से की जाने वाली रसायन-मुक्त और प्रकृति आधारित खेती को बढ़ावा देता है।
एकीकृत कीट प्रबंधन में किन उपायों को जोड़ा जाता है?
इसमें खेती संबंधी, यांत्रिक, जैविक और ज़रूरत के अनुसार रासायनिक नियंत्रण के उपाय शामिल हैं।
परंपरागत कृषि विकास योजना जैविक खेती में किस तरह सहयोग देती है?
यह उत्पादन, प्रसंस्करण, प्रमाणन और विपणन तक पूरी प्रक्रिया में सहयोग देती है।
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