प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री तथा परमाणु ऊर्जा विभाग व अंतरिक्ष विभाग के प्रभारी डॉ. जितेंद्र सिंह ने 18 अगस्त 2026 को पार्श्व प्रवेश से आए संयुक्त सचिवों, निदेशकों और उप सचिवों के 15-दिवसीय रिफ़्रेशर पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित किया। नई दिल्ली में बोलते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और डिजिटल उपकरण शासन को तेज़ी से बदल रहे हैं, और सिविल सेवकों में लगातार सीखने व अनुकूलन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। तेज़ी से बदलते प्रशासनिक माहौल में उन्होंने अधिकारियों से जिज्ञासु शिक्षार्थी बने रहने को कहा। रिफ़्रेशर पाठ्यक्रम में नीति विश्लेषण, डिजिटल परिवर्तन, नगर वित्त, जन स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, शिक्षा और सरकारी संचार शामिल हैं। डॉ. सिंह ने सरकारी अधिकारियों के लिए संचार के चार प्रमुख स्तर बताए—सरकारी पदाधिकारियों और साथियों से; राजनीतिक पदाधिकारियों से; मीडिया से; और आम लोगों से। पार्श्व प्रवेश की संस्थागत व्यवस्था पर उन्होंने बताया कि अब तक इस व्यवस्था से लगभग 63 अधिकारी जुड़े हैं। उन्होंने 15-दिवसीय रिफ़्रेशर को मध्यावधि कैरियर पाठ्यक्रम जैसा बताया। संस्थागत पहुँच बढ़ाते हुए उन्होंने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की पहुँच बढ़ाने और समान काम करने वाले अन्य संस्थानों व एजेंसियों से जोड़ने की ज़रूरत रेखांकित की। उन्होंने कहा कि यह पहुँच केंद्र व राज्य सरकारों, सार्वजनिक संस्थानों और निर्वाचित निकायों तक फैली है, और कॉर्पोरेट व निजी क्षेत्र के प्रतिभागियों के लिए भी पाठ्यक्रम बनाए जा रहे हैं। ये बातें दिल्ली से जारी प्रेस सूचना ब्यूरो विज्ञप्ति में आईं।
जितेंद्र सिंह ने पार्श्व प्रवेश अधिकारियों के 15-दिवसीय रिफ़्रेशर को संबोधित किया; अब तक 63 भर्ती
18 अगस्त 2026 को डॉ. जितेंद्र सिंह ने पार्श्व प्रवेश संयुक्त सचिवों, निदेशकों और उप सचिवों के 15-दिवसीय रिफ़्रेशर को संबोधित किया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम, साइबर सुरक्षा और डिजिटल उपकरणों से शासन परिवर्तन की बात कही, और बताया कि संस्थागत पार्श्व प्रवेश से अब तक लगभग 63 अधिकारी जुड़े हैं।
मुख्य तथ्य
- 18 अगस्त 2026 को राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पार्श्व प्रवेश संयुक्त सचिवों, निदेशकों और उप सचिवों के 15-दिवसीय रिफ़्रेशर को संबोधित किया।
- उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम, साइबर सुरक्षा और डिजिटल उपकरण शासन को तेज़ी से बदल रहे हैं, और लगातार सीखने पर ज़ोर दिया।
- पाठ्यक्रम में नीति विश्लेषण, डिजिटल परिवर्तन, नगर वित्त, जन स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, शिक्षा और सरकारी संचार शामिल हैं।
- उन्होंने संचार के चार स्तर बताए—सरकारी साथी; राजनीतिक पदाधिकारी; मीडिया; और आम लोग।
- संस्थागत पार्श्व प्रवेश से अब तक लगभग 63 अधिकारी जुड़े; उन्होंने रिफ़्रेशर को मध्यावधि कैरियर जैसा पाठ्यक्रम बताया।
- उन्होंने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की पहुँच केंद्र-राज्य सरकारों, सार्वजनिक संस्थानों और निर्वाचित निकायों तक बढ़ाने, तथा कॉर्पोरेट व निजी क्षेत्र के लिए भी पाठ्यक्रम बनाने की बात कही।
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा संबोधित पार्श्व प्रवेश रिफ़्रेशर पाठ्यक्रम के संबंध में सूची-1 का सूची-2 से मिलान कीजिए और नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए: सूची-1 क. संस्थागत पार्श्व प्रवेश से अब तक जुड़े अधिकारी ख. रिफ़्रेशर कार्यक्रम की अवधि ग. अधिकारियों के लिए बताए गए संचार के प्रमुख स्तर घ. इस संबोधन पर दिल्ली से प्रेस सूचना ब्यूरो विज्ञप्ति की तिथि सूची-2 1. 4 2. लगभग 63 3. 15 दिन 4. 18 अगस्त 2026
संस्थागत पार्श्व प्रवेश से लगभग 63 अधिकारी जुड़े हैं (क-2); रिफ़्रेशर 15 दिन का है (ख-3); संचार के चार प्रमुख स्तर बताए गए (ग-1); और दिल्ली से प्रेस सूचना ब्यूरो विज्ञप्ति 18 अगस्त 2026 की है (घ-4)। अतः क-2, ख-3, ग-1, घ-4।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पार्श्व प्रवेश अधिकारियों के 15-दिवसीय रिफ़्रेशर को किसने संबोधित किया?
प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री तथा परमाणु ऊर्जा व अंतरिक्ष विभाग के प्रभारी डॉ. जितेंद्र सिंह।
रिफ़्रेशर पाठ्यक्रम किन पदों के लिए है?
पार्श्व प्रवेश से आए संयुक्त सचिव, निदेशक और उप सचिव।
संस्थागत पार्श्व प्रवेश से अब तक कितने अधिकारी जुड़े हैं?
लगभग 63 अधिकारी।
मंत्री ने सरकारी अधिकारियों के लिए संचार के कौन-से चार स्तर बताए?
सरकारी पदाधिकारियों और साथियों से; राजनीतिक पदाधिकारियों से; मीडिया से; और आम लोगों से।
भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के बारे में उन्होंने क्या कहा?
इसकी पहुँच बढ़े और समान काम वाले अन्य संस्थानों व एजेंसियों से जुड़े; यह पहुँच केंद्र-राज्य सरकारों, सार्वजनिक संस्थानों और निर्वाचित निकायों तक हो, तथा कॉर्पोरेट व निजी क्षेत्र के लिए भी पाठ्यक्रम बनें।
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