राजस्थान सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों का प्रदूषित पानी नदियों में जाने से रोकने के लिए उद्योगों, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को सचिवालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने उद्योग प्रतिनिधियों, औद्योगिक संगठनों तथा जोधपुर, पाली, बालोतरा और जसोल के जिला प्रशासन से व्यावहारिक और असरदार प्रस्ताव मांगे।
श्रीनिवास ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों के सुचारु संचालन के पक्ष में है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और जनहित से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि बिना उपचार के या प्रदूषित औद्योगिक अपशिष्ट जल को किसी भी स्थिति में नदियों में नहीं छोड़ा जाए। स्थायी समाधान के लिए उद्योगों, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल पर भी जोर दिया गया।
निर्देशों में साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्रों का बेहतर उपयोग और नियमित रखरखाव शामिल है, ताकि प्रदूषित पानी का रिसाव न हो। अतिरिक्त मुख्य सचिव, खान एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा ने बताया कि जोजरी सहित अन्य नदियों में प्रदूषित पानी छोड़े जाने के मामले को सुप्रीम कोर्ट गंभीरता से देख रहा है। उनके अनुसार, रासायनिक अपशिष्ट को शोधन संयंत्र में भेजने के बजाय सीधे नदियों में छोड़ने से प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे आगे चलकर उद्योग बंद होने जैसी स्थिति भी बन सकती है।
अरोड़ा ने वैज्ञानिक तरीकों से अपशिष्ट जल का उपचार करने और आईआईटी जैसे तकनीकी संस्थानों की विशेषज्ञता लेने का सुझाव दिया। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव कपिल चंद्रावल ने प्रदूषण की मौजूदा स्थिति और उसे नियंत्रित करने के ज़रूरी उपायों पर प्रस्तुति दी।
