ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के अगले महीने नई दिल्ली आने की संभावना है। वे भारत की मेजबानी में 12–13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। ईरानी सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस से प्रस्तावित यात्रा की पुष्टि की है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून में फोन पर हुई बातचीत के दौरान पेजेशकियन को औपचारिक निमंत्रण दिया था।

शिखर सम्मेलन के अलावा पेजेशकियन की मोदी से द्विपक्षीय वार्ता भी संभावित है। बातचीत में भारत-ईरान संबंध मज़बूत करने, चाबहार बंदरगाह की स्थिति और पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम पर ध्यान रहेगा। भारत होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा सकता है। इस समय 165 से अधिक भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में काम कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा गंभीर चिंता बन गई है। फरवरी से अब तक 16 भारतीय नागरिक मारे गए हैं, जिनमें 10 नाविक शामिल हैं, जबकि 75 अन्य घायल हुए हैं। 14 जुलाई को विदेश मंत्रालय ने ईरान के उप मिशन प्रमुख मोहम्मद जावेद हुसैनी को बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया जिसमें भारतीय नाविकों को ले जा रहे संयुक्त अरब अमीरात के ध्वज वाले 2 ऊर्जा टैंकरों पर ईरानी क्रूज मिसाइलों से हमला हुआ, एक भारतीय नाविक की मृत्यु हुई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। भारत ने ईरान से वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर किसी भी परिस्थिति में हमला न करने को भी कहा।

ईरान जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात के साथ ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना था। पेजेशकियन और मोदी की पिछली मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। भारत ने सितंबर के सम्मेलन के लिए रूस और चीन सहित सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया है।