उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन उपभोक्ता मामले विभाग की राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) ने 25 अप्रैल 2025 से 31 जुलाई 2026 तक की पंद्रह महीने की अवधि में उपभोक्ताओं को 105 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड दिलाने में सहायता की। पत्र सूचना कार्यालय की 9 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, इस अवधि में 35 क्षेत्रों में रिफंड से जुड़ी 1,66,189 शिकायतों का समाधान किया गया।
ये रिफंड मुकदमा-पूर्व चरण में दिलाए गए, जिससे उपभोक्ताओं को उपभोक्ता आयोगों का रुख किए बिना समय पर राहत मिल सकी। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन देशभर के उपभोक्ताओं के लिए शिकायत दर्ज कराने और समाधान पाने का एकल-संपर्क मंच बनकर उभरी है।
ई-कॉमर्स क्षेत्र में रिफंड संबंधी शिकायतों की संख्या सबसे अधिक रही। इस क्षेत्र में 1,00,466 शिकायतों के परिणामस्वरूप 74 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड दिलाने में सहायता मिली। इसके बाद यात्रा एवं पर्यटन क्षेत्र रहा, जहाँ 10 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड दिलाने में मदद हुई। मई से जुलाई 2026 के दौरान ई-कॉमर्स क्षेत्र में दिए गए रिफंड एक रुपये से लेकर 35,83,790 रुपये तक रहे, जिनमें अलग-अलग प्रकार और मूल्य की शिकायतें शामिल थीं।
एनसीएच समन्वय-आधारित व्यवस्था से काम करती है। इसके अंतर्गत उपभोक्ताओं की शिकायतें डिजिटल तरीके से संबंधित कंपनियों को भेजी जाती हैं, ताकि निर्धारित समय-सीमा में समाधान हो सके। इस प्रक्रिया में उपभोक्ता की प्रतिक्रिया की निरंतर निगरानी और शिकायत की स्थिति पर नज़र रखने की व्यवस्था भी शामिल है। रिफंड संबंधी शिकायतें महानगरों के साथ दूरदराज के क्षेत्रों से भी आई हैं, जो इस मंच की देशव्यापी पहुँच दर्शाती हैं।
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 17 भाषाओं में शिकायत निवारण की सुविधा देती है। उपलब्ध माध्यमों में टोल-फ्री नंबर 1915, व्हाट्सएप/एसएमएस 8800001915, आईएनजीआरएएम पोर्टल, ईमेल, एनसीएच मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और उमंग ऐप शामिल हैं। विज्ञप्ति के अनुसार, 105 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड दिलाना मुकदमा-पूर्व चरण में सुलभ और समयबद्ध निवारण में एनसीएच की महत्वपूर्ण भूमिका दिखाता है और डिजिटल बाज़ारों तथा सेवा पारिस्थितिकी में उपभोक्ता विश्वास को मज़बूत करने में भी योगदान देता है।
