उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित अरावली उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने 9 अगस्त को अजमेर के जवाहर रंगमंच में जनसुनवाई की। यह जनसुनवाई रविवार को हुई, जिसमें अरावली पर्वतमाला से जुड़े अलग-अलग पक्ष समिति के सामने रखे गए।

जनसुनवाई में अरावली पर्वतमाला की परिभाषा, उसकी पारिस्थितिक अखंडता और संरक्षण पर विचार सुने गए। इसके साथ ही खनन, आजीविका और पर्यावरण से जुड़े पक्षों को भी अपनी बात रखने का अवसर मिला। इस प्रकार सुनवाई में अरावली की परिभाषा और संरक्षण के साथ मानवीय गतिविधियों तथा पर्यावरण से जुड़े विषय भी शामिल रहे।

उच्चतम न्यायालय ने स्वप्रेरित रिट याचिका (सिविल) संख्या 10/2025 में 25 मई 2026 को पारित आदेश के तहत इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था। समिति को अरावली पहाड़ियों एवं श्रृंखलाओं की परिभाषा, उनकी पारिस्थितिक अखंडता और संरक्षण का आकलन करना है। न्यायालय के आदेश में आकलन के लिए परिभाषा, पारिस्थितिक अखंडता और संरक्षण के विषय तय किए गए हैं।

समिति को अपनी रिपोर्ट पेश करने से पहले विभिन्न हितधारकों से परामर्श करना है। रिपोर्ट पेश करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है। अजमेर की जनसुनवाई में समिति ने पर्वतमाला की परिभाषा, पारिस्थितिक अखंडता और संरक्षण के अलावा खनन, आजीविका तथा पर्यावरण से जुड़े विभिन्न पक्ष सुने।

परीक्षा की दृष्टि से उच्चतम न्यायालय द्वारा समिति का गठन, 25 मई 2026 का आदेश, स्वप्रेरित रिट याचिका (सिविल) संख्या 10/2025, अजमेर के जवाहर रंगमंच में हुई जनसुनवाई, सुनवाई के विषय, हितधारकों से परामर्श और 31 अगस्त 2026 की समय-सीमा मुख्य तथ्य हैं।