प्रेस सूचना ब्यूरो की 4 अगस्त 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, भारत ने 2021 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को वापस लाया है। इनमें वित्तीय अपराध, आतंकवादी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियाँ, संगठित अपराध, हिंसक अपराध, यौन अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध, मानव तस्करी और अपहरण के मामलों में वांछित लोग शामिल हैं। विज्ञप्ति में इस कार्रवाई को वैश्विक अभियान, मज़बूत समन्वय और सूझबूझ भरी कूटनीति पर आधारित एकीकृत, खुफिया जानकारी और तकनीक से चलने वाला तरीका बताया गया है। कानूनी बदलाव भी इसका अहम हिस्सा हैं। वर्ष 2019 में NIA और UAPA संशोधन अधिनियम लाए गए। वर्ष 2024 में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों में भगोड़ों से जुड़े विशेष प्रावधान किए गए। BNSS की धारा 355 और 356 के तहत भगोड़े की अनुपस्थिति में भी मुकदमे की पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। संस्थागत समन्वय बढ़ाने के लिए जनवरी 2025 में भारतपोल शुरू किया गया। इसके पोर्टल से सीबीआई, राज्यों और जिलों के पुलिस मुख्यालयों सहित 1,400 से अधिक इकाई कार्यालय जुड़े हैं। विज्ञप्ति के मुताबिक, सीबीआई द्वारा माँगी गई जानकारी अब 10 से 20 दिन में और कुछ मामलों में 3 से 10 दिन में मिल जाती है। पिछले 3 वर्षों में इंटरपोल ने 401 भगोड़ों के विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए। ऑपरेशन त्रिशूल में उपग्रह से मिली जानकारी, निगरानी, डिजिटल निशान और पहचान की रूपरेखा के सहारे विदेशों में बदले नाम या पहचान से छिपे अपराधियों का पता लगाया गया। PMLA के सख्त अमल से 2019 से 2026 के बीच ₹17,874 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त हुई और ₹18,762 करोड़ वापस दिलाए गए।