भारत और रवांडा की संयुक्त व्यापार समिति का पहला सत्र 30 और 31 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में हुआ। समिति ने वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार की समीक्षा की। दोनों पक्ष व्यापार में विविधता लाने, व्यापारिक संबंधों को सुगम बनाने और बाज़ार तक पहुँच से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करने पर सहमत हुए। भारत से रवांडा को औषधि और जैविक उत्पाद, दोपहिया तथा तिपहिया वाहन, औद्योगिक एवं विद्युत मशीनरी, तेल खली और लोहा-इस्पात उत्पाद प्रमुख रूप से निर्यात होते हैं। रवांडा से भारत को सीसा, मसाले, आवश्यक तेल, तांबा, बहुमूल्य एवं अर्ध-बहुमूल्य पत्थर, प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद और खनिज निर्यात किए जाते हैं। रवांडा के औषधि आयात में भारत सबसे बड़ा स्रोत है और उसकी हिस्सेदारी लगभग 24.5 प्रतिशत है। रवांडा ने बताया कि 2025 तक भारत उसका दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक था। दोनों देशों ने इन्वेस्ट इंडिया और रवांडा विकास बोर्ड को निवेश से जुड़े प्रमुख संपर्क केंद्र बनाया। सहयोग के प्राथमिक क्षेत्रों में रवांडा के टिन, टंगस्टन और टैंटलम संसाधन, औषधि एवं स्वास्थ्य सेवा, कृषि एवं कृषि-प्रसंस्करण, वस्त्र एवं चमड़ा, हरित परिवहन, डिजिटल सार्वजनिक ढाँचा, वित्तीय प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा शामिल हैं। भारत ने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम, स्टडी इन इंडिया पहल और स्किल इंडिया मिशन से क्षमता विकास में लगातार सहायता देने की पेशकश भी की। सहमति के कार्यवृत्त पर 31 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए। समिति का दूसरा सत्र एक वर्ष बाद, आपसी सहमति से तय तारीख पर रवांडा में होगा।