विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन तथा परमाणु ऊर्जा व अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कोलकाता में छठे आरआईएसई कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को महानगरों से आगे ले जाना होगा: देश के 50-60 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप महानगरों से जुड़े नहीं हैं, और छोटे शहरों के युवा नवप्रवर्तक बड़े शहरों के समकक्षों के बराबर—कई मामलों में उनसे आगे—प्रदर्शन कर रहे हैं। वैज्ञानिक संस्थानों और नवाचार तंत्र को इन युवाओं तक पहुँचना चाहिए, न कि उनसे यह उम्मीद करनी चाहिए कि वे स्थापित प्रौद्योगिकी केंद्रों तक आएँ।

6-7 सितंबर को सीएसआईआर-भारतीय रासायनिक जीवविज्ञान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईसीबी), साल्ट लेक में आयोजित यह सम्मेलन सीएसआईआर-सीजीसीआरआई, सीएसआईआर-आईआईसीबी, सीएसआईआर-सीएमईआरआई और सीएसआईआर-आईएमएमटी द्वारा संयुक्त रूप से "विकसित भारत 2047 के लिए नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना" थीम पर चला। इसमें स्टार्टअप, उद्योग, शिक्षा जगत, शोधकर्ता, निवेशक, इनक्यूबेटर, एमएसएमई और नीति निर्माता एक मंच पर जुड़े ताकि स्वदेशी तकनीकों की प्रयोगशाला से बाज़ार तक की यात्रा तेज़ हो। केंद्र में 4 एम ढांचा—खनिज, औषधि, सामग्री और मशीनें—था, जो चार सीएसआईआर प्रयोगशालाओं की पूरक शक्तियों को दर्शाता है; उन्होंने उन्नत सामग्री, स्वास्थ्य सेवा, मशीनरी, स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और टिकाऊ इंजीनियरिंग समाधान दिखाए।

ठोस परिणामों में आठ समझौता ज्ञापन, चार प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, दो उत्पाद शुभारंभ और एक सुविधा का उद्घाटन शामिल रहे; साथ ही सीजीसीआरआई का नया लोगो, संकलन और बूटकैंप भी लॉन्च हुए। स्टार्टअप प्रदर्शनी और विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंडप में लगभग 150 स्टार्टअप, करीब 300 स्टार्टअप प्रतिनिधि तथा इनक्यूबेशन व नवाचार केंद्रों के 150 प्रतिनिधि जुड़े। 67 पैनलिस्टों वाली आठ पैनल चर्चाओं में किफायती स्वास्थ्य सेवा, एमएसएमई अनुसंधान-नवाचार, सामग्री आधारित नवाचार, इस्पात व एल्युमीनियम का डीकार्बोनाइजेशन, महत्वपूर्ण खनिज, विज्ञान संचार, विज्ञान-आधारित स्टार्टअप अवसर और पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक नवाचार शामिल रहे। डॉ. सिंह ने कोलकाता की वैज्ञानिक विरासत का स्मरण किया, आईआईटी खड़गपुर, आईआईएसईआर कोलकाता, एनआईटी दुर्गापुर और अटल टिंकरिंग लैब्स से जुड़े पूर्वी भारत ज्ञान गलियारे की संभावना बताई, तथा 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष व अनुसंधान नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (एएनआरएफ) की उच्च-जोखिम अनुसंधान और शिक्षा-स्टार्टअप-उद्योग साझेदारी वाली भूमिका का उल्लेख किया।