नासा ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो को अपने चंद्र आधार कार्यक्रम से जुड़ने का निमंत्रण दिया है। यह पहल आर्टेमिस समझौते के तहत भारत-अमेरिका अंतरिक्ष साझेदारी को आगे बढ़ाती है। भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने यह घोषणा भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह की 9वीं बैठक के बाद की। बैठक 5-6 अगस्त को बेंगलुरु स्थित इसरो मुख्यालय में हुई। दोनों पक्षों ने मानव अंतरिक्ष उड़ान, अंतरिक्ष विज्ञान, पृथ्वी अवलोकन और भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने आर्टेमिस समझौते के तहत वैज्ञानिक आँकड़े खुले तौर पर साझा करने पर भी बातचीत आगे बढ़ाने की सहमति जताई।

नासा ने चंद्र आधार की परिकल्पना चरणबद्ध कार्यक्रम के रूप में की है। इसका लक्ष्य चंद्रमा की सतह, खासकर दक्षिणी ध्रुव के आसपास, मनुष्यों की दीर्घकालिक मौजूदगी स्थापित करना है। कार्यक्रम वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास में मदद करेगा तथा भविष्य में मंगल ग्रह के लिए मानवयुक्त अभियानों की तैयारी का आधार बनेगा। 2029 तक चलने वाले पहले चरण में रोबोट अभियानों से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का अध्ययन, तकनीकों का प्रदर्शन और स्थायी मौजूदगी की नींव तैयार की जाएगी। 2029 से 2032 तक दूसरे चरण में लंबे समय तक मौजूदगी के लिए प्रणालियाँ और बुनियादी ढाँचा बनाया जाएगा। तीसरे चरण में ऐसे स्थायी चंद्र केंद्र का निर्माण शुरू होगा, जहाँ अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक रहकर काम कर सकेंगे।

भारत जून 2023 में आर्टेमिस समझौते से जुड़ा और इसका 27वाँ हस्ताक्षरकर्ता बना। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि यह निमंत्रण भारत-अमेरिका सुदूर अंतरिक्ष साझेदारी को गहरा करेगा। बैठक की अध्यक्षता इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन और राजदूत गोर ने की। एम. शंकरन, वेस्ली ब्रूक्स और कैथलीन करिका सह-अध्यक्ष रहे। दोनों पक्षों ने फरवरी 2025 के संयुक्त नेताओं के वक्तव्य के अनुरूप भारत-अमेरिका ट्रस्ट पहल के तहत सहयोग की प्रतिबद्धता भी दोहराई।