बीकानेर के आचार्य तुलसी रीजनल रिसर्च कैंसर इंस्टीट्यूट में मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले सरकारी कैंसर इंजेक्शन दिल्ली के कालाबाज़ार में मिलने की खबर के बाद राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) ने जांच शुरू कर दी है। निगम ने जांच समिति गठित की है जो जिलों में जाकर रिकॉर्ड खंगाल रही है।
आरएमएससीएल के प्रबंध निदेशक पुखराज सेन ने बताया कि दिल्ली में मिले इंजेक्शन की आपूर्ति को लेकर राजस्थान में जांच शुरू हो चुकी है। प्रदेश में जहाँ-जहाँ संबंधित दवा की आपूर्ति हुई है, वहाँ की पूरी आपूर्ति श्रृंखला जांच के दायरे में है। उन्होंने कहा कि दवा आपूर्ति के लिए प्रदेश में करीब 40 गोदाम बनाए गए हैं और इन्हीं से अस्पतालों तक दवा पहुँचाई जाती है।
महंगी दवाओं की कालाबाज़ारी की आशंका को देखते हुए खरीद और इस्तेमाल के नियम बनाए जाते हैं। वर्ष 2002 में जारी सर्कुलर के अनुसार 3 हजार रुपये या इससे अधिक कीमत की दवा जारी होने पर उसका रिकॉर्ड संबंधित मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को रखना अनिवार्य है। दवा अस्पताल पहुँचने के बाद सुरक्षित इस्तेमाल और रिकॉर्ड की ज़िम्मेदारी संबंधित अस्पताल या मेडिकल कॉलेज की होती है। इस मामले में संबंधित मेडिकल कॉलेज से भी जवाब माँगा गया है कि सरकारी दवा कालाबाज़ार तक कैसे पहुँची।
आरएमएससीएल यह भी जाँच रहा है कि दिल्ली में पकड़ा गया इंजेक्शन वास्तव में निगम की ओर से आपूर्ति किया गया था या नहीं। सेन के मुताबिक कई मामलों में जिस बैच की जानकारी दी गई, वह बैच आरएमएससीएल ने आपूर्ति ही नहीं किया था। इसलिए जांच में बैच नंबर, आपूर्ति की तारीख और अस्पताल तक पहुँचने की पूरी प्रक्रिया शामिल है; समिति यह भी देखेगी कि दवा किस गोदाम से किस अस्पताल को और कब भेजी गई तथा अस्पताल में इस्तेमाल व स्टॉक का रिकॉर्ड क्या है।
