भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति (जेडीसी) की पहली बैठक 28 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार दोनों पक्षों ने प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास, सैन्य चिकित्सा, अधिकारिक सैन्य वार्ता, रक्षा उद्योग तथा अनुसंधान और विकास समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
यह बैठक भारत और कुवैत के बीच रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन में बताए उद्देश्यों पर अमल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह समझौता ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दिसंबर 2024 की कुवैत यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था।
बैठक की सह-अध्यक्षता रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और कुवैती प्रतिनिधिमंडल के ब्रिगेडियर जनरल राएद अलसकरान ने की। भारतीय पक्ष में थल, वायु और नौसेना सहित तीनों सेनाओं, रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन-डीआरडीओ, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल रहे।
समिति की बैठक से पहले ब्रिगेडियर जनरल राएद अलसकरान ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर सैन्य शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यात्रा के पहले दिन कुवैती प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम के डीपीएसयू भवन का दौरा किया और भारतीय रक्षा उद्योग प्रतिनिधियों से आपसी सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा की। यात्रा के दूसरे दिन उद्योग जगत से वार्ता भी निर्धारित है।
भारत और कुवैत के पारंपरिक सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध ऐतिहासिक जड़ों पर टिके हैं। दोनों देशों के बीच 1962 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की कुवैत यात्रा के दौरान इस संबंध को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर उठाया गया था। भौगोलिक निकटता, ऐतिहासिक व्यापारिक संबंध, सांस्कृतिक समानताएँ और कुवैत में बड़ी संख्या में भारतीयों की उपस्थिति दोनों देशों के दीर्घकालिक और बहुआयामी संबंधों को मज़बूत बनाने में सहायक रही हैं।
