विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान, मोहाली स्थित नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी संस्थान के वैज्ञानिकों ने अपकनवर्जन नैनोकणों पर आधारित बहुक्रियाशील, प्रकाश-चालित नैनोबोट विकसित किए हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य पारंपरिक कीमोथेरेपी की कमियों से निपटना है। इनमें दवा का गैर-विशिष्ट वितरण, ट्यूमर में दवा की कम पैठ, दवा प्रतिरोध, स्वस्थ ऊतकों को नुकसान और उपचार के बाद सक्रिय नियंत्रण का अभाव शामिल हैं। मौजूदा प्रकाश-चालित सूक्ष्म और नैनोरोबोटों में से अधिकतर को पराबैंगनी या दृश्य प्रकाश चाहिए, जिसकी ऊतकों में पैठ सीमित होती है और जिससे स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंच सकता है। नए नैनोबोट बिना ईंधन के निकट-अवरक्त प्रकाश पर प्रतिक्रिया करते हैं। 980 नैनोमीटर के निकट-अवरक्त लेजर से पॉलीडोपामीन स्थानीय ताप पैदा करता है और तापमान का अंतर बनता है। इससे उत्पन्न तापीय गति नैनोबोटों को प्रकाशानुवर्तन के ज़रिए लेजर स्रोत की ओर ले जाती है। प्रकाश-संवेदी पदार्थ निकट-अवरक्त विकिरण में प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियां भी बनाता है। इस तरह प्रकाश-तापीय ऊष्मा और प्रकाश-गतिशील क्रिया मिलकर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। फोलिक एसिड से सतह को क्रियाशील बनाने पर नैनोबोट फोलेट ग्राही की अधिकता वाली स्तन कैंसर कोशिकाओं को चुनकर पहचान और लक्षित कर सकते हैं। जैविक माध्यम में यह लक्ष्यीकरण लेजर की तीव्रता, पीएच और ग्लूटाथियोन की सांद्रता से नियंत्रित होता है। दोनों उपचारों के संयुक्त प्रभाव से किसी एक उपचार की तुलना में ट्यूमर को रोकने के बेहतर परिणाम मिले। टीम ने कोशिका-आधारित प्रतिरूपों और स्तन ट्यूमर वाले चूहों, दोनों में उपचार का प्रभाव दिखाया। एसीएस एप्लाइड मैटेरियल्स एंड इंटरफेसेस में प्रकाशित यह शोध सटीक, बाहरी नियंत्रण वाले और कम चीर-फाड़ के स्थानीय उपचार की संभावना बताता है।