ऐक्सिस म्यूचुअल फंड के सौदों से पहले खरीद-बिक्री के मामले में सेबी का अंतिम आदेश
Aसीधा उत्तर
सेबी के 24 जुलाई 2026 के अंतिम आदेश में ऐक्सिस म्यूचुअल फंड के सौदों से पहले खरीद-बिक्री के मामले में 21 पक्षों के नाम हैं। आदेश में जानकारी साझा करने और दूसरे खातों से सौदे करने का घटनाक्रम दर्ज है तथा अनुचित लाभ की वापसी, 12 प्रतिशत सालाना ब्याज, जुर्माने और 45 दिनों में भुगतान के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य तथ्य
अंतिम आदेश 24 जुलाई 2026 का है और इसमें 21 नोटिस पाने वाले पक्षों के नाम हैं।
जाँच 1 सितंबर 2021 से 31 मार्च 2022 तक चली।
वीरेश जोशी ने फंड के आगामी आदेशों की गैर-सार्वजनिक जानकारी प्रिजेश कुरानी को दी और कुरानी ने माध्यम या मुखौटा खातों से सौदे किए।
ज़ब्त राशि को अनुचित लाभ की वापसी मानकर निवेशक संरक्षण और शिक्षा कोष में जमा करना है तथा जाँच अवधि समाप्त होने के बाद से जमा होने तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा।
वीरेश जोशी पर ₹3 करोड़ और प्रिजेश कुरानी पर ₹1 करोड़ का जुर्माना है, जिसे 45 दिनों में चुकाना होगा; आदेश तुरंत प्रभावी है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने 24 जुलाई 2026 को ऐक्सिस म्यूचुअल फंड के सौदों से पहले खरीद-बिक्री किए जाने के मामले में अंतिम आदेश जारी किया। आदेश में 21 नोटिस पाने वाले पक्षों के नाम हैं। जाँच की अवधि 1 सितंबर 2021 से 31 मार्च 2022 तक रही।
आदेश के अनुसार, उस समय ऐक्सिस म्यूचुअल फंड के मुख्य डीलर रहे वीरेश जोशी ने फंड के होने वाले सौदों के आदेशों से जुड़ी ऐसी जानकारी प्रिजेश कुरानी को दी जो सार्वजनिक नहीं थी। कुरानी ने माध्यम या मुखौटा खातों के ज़रिए सौदे किए। आदेश में दर्ज घटनाक्रम का केंद्र यही है कि फंड के आगामी आदेशों की जानकारी साझा हुई और फिर दूसरे खातों के ज़रिए खरीद-बिक्री की गई।
आदेश में ज़ब्त राशि और जुर्मानों के लिए अलग-अलग निर्देश दिए गए हैं। ज़ब्त राशि को अनुचित लाभ की वापसी मानते हुए निवेशक संरक्षण और शिक्षा कोष में जमा करना है। इस राशि पर जाँच अवधि समाप्त होने के बाद से जमा किए जाने तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा। जाँच 31 मार्च 2022 को समाप्त हुई थी, इसलिए आदेश में बताई गई ब्याज अवधि इसी तारीख से शुरू होती है।
वीरेश जोशी पर ₹3 करोड़ और प्रिजेश कुरानी पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना 45 दिनों के भीतर चुकाना होगा। अंतिम आदेश तुरंत प्रभावी हो गया है। परीक्षा के लिए 21 पक्षों की संख्या, जाँच अवधि, जोशी और कुरानी की भूमिका, ज़ब्त राशि का निपटारा, 12 प्रतिशत सालाना ब्याज, दोनों जुर्माने और 45 दिनों की समय-सीमा प्रमुख तथ्य हैं।
0
6-अक्ष वर्गीकरण
विषयसमसामयिकी · अर्थव्यवस्थापरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतसमाचार स्रोत
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करें
नीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
जुड़ा प्रश्नमध्यम
सेबी के अंतिम आदेश के विवरण के आधार पर सूची 1 का सूची 2 से मिलान कीजिए:
सूची 1
1. वीरेश जोशी
2. प्रिजेश कुरानी
3. ज़ब्त राशि पर ब्याज
सूची 2
क. ₹3 करोड़
ख. ₹1 करोड़
ग. 12 प्रतिशत सालाना
सही उत्तर चुनिए:
व्याख्या · सही उत्तर B
सही मिलान 1-क, 2-ख, 3-ग है। आदेश में वीरेश जोशी पर ₹3 करोड़ और प्रिजेश कुरानी पर ₹1 करोड़ का जुर्माना है। ज़ब्त राशि पर जाँच अवधि समाप्त होने के बाद से जमा होने तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा।
आदेश में वीरेश जोशी और प्रिजेश कुरानी की क्या भूमिका बताई गई है?
आदेश के अनुसार, जोशी ने फंड के आगामी आदेशों की गैर-सार्वजनिक जानकारी कुरानी को दी और कुरानी ने माध्यम या मुखौटा खातों के ज़रिए सौदे किए।
आदेश में ज़ब्त राशि के बारे में क्या निर्देश है?
राशि को अनुचित लाभ की वापसी मानकर निवेशक संरक्षण और शिक्षा कोष में जमा करना है। जाँच अवधि समाप्त होने के बाद से जमा होने तक इस पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा।
जुर्माना कितना है और भुगतान की समय-सीमा क्या है?
वीरेश जोशी पर ₹3 करोड़ और प्रिजेश कुरानी पर ₹1 करोड़ का जुर्माना है। इसे 45 दिनों के भीतर चुकाना होगा।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।