भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने 24 जुलाई 2026 को ऐक्सिस म्यूचुअल फंड के सौदों से पहले खरीद-बिक्री किए जाने के मामले में अंतिम आदेश जारी किया। आदेश में 21 नोटिस पाने वाले पक्षों के नाम हैं। जाँच की अवधि 1 सितंबर 2021 से 31 मार्च 2022 तक रही।

आदेश के अनुसार, उस समय ऐक्सिस म्यूचुअल फंड के मुख्य डीलर रहे वीरेश जोशी ने फंड के होने वाले सौदों के आदेशों से जुड़ी ऐसी जानकारी प्रिजेश कुरानी को दी जो सार्वजनिक नहीं थी। कुरानी ने माध्यम या मुखौटा खातों के ज़रिए सौदे किए। आदेश में दर्ज घटनाक्रम का केंद्र यही है कि फंड के आगामी आदेशों की जानकारी साझा हुई और फिर दूसरे खातों के ज़रिए खरीद-बिक्री की गई।

आदेश में ज़ब्त राशि और जुर्मानों के लिए अलग-अलग निर्देश दिए गए हैं। ज़ब्त राशि को अनुचित लाभ की वापसी मानते हुए निवेशक संरक्षण और शिक्षा कोष में जमा करना है। इस राशि पर जाँच अवधि समाप्त होने के बाद से जमा किए जाने तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा। जाँच 31 मार्च 2022 को समाप्त हुई थी, इसलिए आदेश में बताई गई ब्याज अवधि इसी तारीख से शुरू होती है।

वीरेश जोशी पर ₹3 करोड़ और प्रिजेश कुरानी पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना 45 दिनों के भीतर चुकाना होगा। अंतिम आदेश तुरंत प्रभावी हो गया है। परीक्षा के लिए 21 पक्षों की संख्या, जाँच अवधि, जोशी और कुरानी की भूमिका, ज़ब्त राशि का निपटारा, 12 प्रतिशत सालाना ब्याज, दोनों जुर्माने और 45 दिनों की समय-सीमा प्रमुख तथ्य हैं।