भारी उद्योग मंत्रालय को एकीकृत सिंटर्ड एनडीफेबी दुर्लभ-मृदा स्थायी चुंबक संयंत्र लगाने के लिए निर्माताओं के चयन के लिए सीपीपी पोर्टल पर जारी वैश्विक निविदा से 20 बोलियां मिलीं। तकनीकी बोलियां 13 अगस्त 2026 को बोलीदाताओं की मौजूदगी में मंत्रालय में खोली गईं। बोलियां जमा करने की अंतिम तारीख 12 अगस्त 2026 थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 नवंबर 2025 को ₹7,280 करोड़ के वित्तीय प्रावधान वाली इस योजना को मंज़ूरी दी थी। मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को इसकी अधिसूचना जारी की। प्रस्ताव के लिए अनुरोध 20 मार्च 2026 को जारी हुआ और बोली-पूर्व सम्मेलन 7 अप्रैल 2026 को आयोजित किया गया। अपनी तरह की इस पहली योजना का लक्ष्य भारत में एकीकृत संयंत्रों की कुल वार्षिक विनिर्माण क्षमता 6,000 मीट्रिक टन तक पहुंचाना है। वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया से यह क्षमता पांच लाभार्थियों को आवंटित की जाएगी। प्रत्येक लाभार्थी को अधिकतम 1,200 मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता मिल सकती है। योजना की कुल अवधि सात वर्ष है। इसमें संयंत्र लगाने के लिए दो वर्ष और चुंबकों की बिक्री पर प्रोत्साहन के लिए पांच वर्ष रखे गए हैं। दुर्लभ-मृदा स्थायी चुंबक दुनिया के सबसे शक्तिशाली चुंबकों में गिने जाते हैं। इनका व्यापक उपयोग विद्युत वाहनों, पवन टर्बाइनों, उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, अंतरिक्ष एवं विमानन और रक्षा प्रणालियों में होता है। भारत में एनडीपीआर ऑक्साइड से तैयार चुंबक तक पूरी मूल्य शृंखला विकसित होने से आयात पर निर्भरता घटने, घरेलू उद्योगों की आपूर्ति शृंखला मज़बूत होने और वैश्विक बाज़ार में भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है। यह पहल 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य और विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण में भी सहायक होगी।