रेलवे स्टेशनों पर पेयजल की गुणवत्ता संबंधी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के बाद रेल मंत्रालय ने यात्रियों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के लिए कई उपाय घोषित किए। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में उच्चस्तरीय बैठक की, पूरे रेल तंत्र में पानी की गुणवत्ता की समीक्षा की और अधिकारियों को तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

‘टंकी से नल तक’ जल शोधन और निगरानी व्यवस्था करीब 20,000 स्थानों पर लगाई जाएगी। इनमें पानी ठंडा करने वाली मशीनें भी शामिल हैं। रेलवे पुरानी पानी की टंकियां बदलेगा, स्रोत और निकास बिंदुओं पर नियमित जांच कराएगा, केंद्रीकृत निगरानी शुरू करेगा तथा भंडारण टंकियों की तय अंतराल पर सफाई और देखभाल करेगा। रेलवे बोर्ड क्रियान्वयन की सीधी निगरानी करेगा। पारदर्शिता के लिए पानी की गुणवत्ता और प्रगति की रिपोर्ट समय-समय पर प्रकाशित की जाएगी।

‘भारतीय रेल के गैर-उपनगरीय स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता’ शीर्षक वाली महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में 49 में से 8 स्टेशनों के पेयजल नमूनों में ई. कोलाई पाया गया। प्रभावित स्टेशनों में मुंबई के कई स्टेशन शामिल थे; अन्य मामले केरल, तमिलनाडु और झारखंड में मिले। रिपोर्ट के अनुसार जलापूर्ति प्रणालियों का निरीक्षण निर्धारित अंतराल पर नहीं हुआ। अवशिष्ट क्लोरीन की जांच तथा जीवाणु संबंधी और रासायनिक विश्लेषण में भी कमी रही। क्लोरीन का कम या अधिक स्तर, ई. कोलाई सहित कुल कोलीफॉर्म जीवाणु और जांचे गए मानकों की कमियां असंतोषजनक जल गुणवत्ता की ओर संकेत करती हैं। एकसमान पेयजल गुणवत्ता प्रक्रिया के कई मानकों की जांच नहीं की गई।

महालेखा परीक्षक ने निर्धारित निरीक्षण और जांच प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन तथा मानक प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक मानक की व्यापक जांच करने की सिफारिश की।