3 अगस्त 2026 को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील को भारत का 101वां रामसर स्थल घोषित किए जाने की घोषणा की। यह अरुणाचल प्रदेश का पहला रामसर स्थल है। मंत्री ने इस उपलब्धि को जैव विविधता संरक्षण, जल एवं जलवायु सुरक्षा और सतत आजीविका की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

इस घोषणा के साथ भारत के रामसर स्थलों की संख्या 100 के पार पहुंचकर 101 हो गई। मंत्री के अनुसार, देश में 2014 में 26 रामसर स्थल थे, जबकि 2026 में यह संख्या 101 हो गई। उन्होंने इस बढ़ोतरी को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा और सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता से जोड़ा। उनके अनुसार, हर नया रामसर स्थल प्रकृति की रक्षा और इन पारिस्थितिक तंत्रों पर निर्भर समुदायों के हित सुरक्षित रखने के संकल्प को मज़बूत करता है।

ग्लाव झील पूर्वी हिमालय में कमलांग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित है। यह साफ़ मीठे पानी की झील और जैव विविधता का प्रमुख केंद्र है। बारहमासी पहाड़ी धाराएं इसे पानी देती हैं और इसके चारों ओर की घनी वनस्पति समृद्ध पादप विविधता को सहारा देती है। इस आर्द्रभूमि में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियां और 49 ऑर्किड प्रजातियां पाई जाती हैं। ये विशेषताएं ग्लाव झील और आसपास के क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व को सामने लाती हैं। इस तरह यह घोषणा आर्द्रभूमि संरक्षण की राष्ट्रीय उपलब्धि के साथ अरुणाचल प्रदेश के जैव विविधता से भरपूर मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्र को भी पहचान देती है।