केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026 के मसौदे को मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार इस संशोधन विधेयक को अगले सप्ताह संसद में पेश कर सकती है। इसका उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक समेत सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर सजा कड़ी करना और जांच व सुनवाई के लिए समय-सीमा तय करना है।
अनुचित साधनों में शामिल व्यक्तियों के लिए प्रस्तावित कैद 3 से 5 वर्ष के बजाय 5 से 10 वर्ष होगी। जुर्माना भी ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख करने का प्रस्ताव है। संगठित अपराध के मामले में न्यूनतम कैद 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष और न्यूनतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने का प्रस्ताव है।
मसौदे में ऐसे मामलों की जांच 2 महीने में पूरी करने के लिए विशेष कार्यबल का प्रावधान है। प्रत्येक राज्य सरकार और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन को संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके किसी सत्र न्यायालय को विशेष त्वरित न्यायालय के रूप में नामित करना होगा। वहां प्रतिदिन सुनवाई होगी और आरोपपत्र दाखिल होने के 3 महीने के भीतर मुकदमा पूरा करना होगा। संशोधित कानून लागू होने पर लंबित मामले भी इन न्यायालयों में भेजे जाएंगे।
विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के कथन के अनुसार, ये बदलाव सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता मजबूत करने, उसकी विश्वसनीयता बढ़ाने और समयबद्ध जांच व त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए हैं। मौजूदा 2024 का कानून केंद्रीय लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की परीक्षाओं पर लागू होता है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ही नीट कराती है।
