राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) ने 12 अगस्त 2026 को ई-निरीक्षण और ई-प्रमाणित प्रति सेवाएँ शुरू कीं। एनसीएलटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से इनका औपचारिक उद्घाटन किया। यह कदम अधिकरण की रजिस्ट्री को ज़्यादा सुलभ और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में उठाया गया है। इन सेवाओं से अधिवक्ताओं, वादकारियों और अन्य हितधारकों को न्यायिक अभिलेख तथा प्रमाणित प्रतियाँ सुविधाजनक और तेज़ी से मिल सकेंगी। ये सेवाएँ एनसीएलटी के व्यापक डिजिटल बदलाव का हिस्सा हैं। इसी बदलाव में नए रूप में तैयार एनसीएलटी वेबसाइट और जारी ई-कोर्ट्स 2.0 पहल भी शामिल हैं। लंबित मामलों पर नज़र रखने के लिए एनसीएलटी ने अलग-अलग पीठों में आँकड़ों पर आधारित व्यवस्था अपनाई है। जुटाए गए आँकड़ों के आधार पर कार्यभार की समीक्षा और उसका बँटवारा किया गया, ज़रूरत पड़ने पर विशेष पीठें बनाई गईं और उपलब्ध न्यायालयीन समय का अधिकतम उपयोग करने की कोशिश की गई। इन उपायों के बाद अप्रैल-जून 2026 में 78 समाधान योजनाओं को मंज़ूरी मिली। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता लागू होने के बाद किसी पहली तिमाही का यह अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। इन मामलों में लगभग ₹5,517.66 करोड़ की राशि शामिल है। सीमित न्यायिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए एनसीएलटी ने बार से सलाह लेकर मामलों के पंजीकरण और सूचीबद्ध करने के विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए। न्यायमूर्ति ग्रेवाल ने माना कि बुनियादी ढाँचे और कर्मचारियों से जुड़ी चुनौतियाँ अब भी हैं। फिर भी अधिकरण गैर-ज़रूरी देरी घटाने और कामकाज बेहतर करने की कोशिश जारी रखे हुए है। नई सेवाएँ न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, कुशल और हितधारकों के अनुकूल बनाने की इसी कोशिश का हिस्सा हैं।
एनसीएलटी ने ई-निरीक्षण और ई-प्रमाणित प्रति सेवाएँ शुरू कीं
एनसीएलटी ने न्यायिक अभिलेखों तक पहुँच आसान बनाने के लिए ई-निरीक्षण और ई-प्रमाणित प्रति सेवाएँ शुरू की हैं। यह पहल देरी घटाने और मामलों का प्रबंधन बेहतर करने के लिए चल रहे डिजिटल बदलाव तथा आँकड़ा-आधारित उपायों का हिस्सा है।
मुख्य तथ्य
- एनसीएलटी ने 12 अगस्त 2026 को ई-निरीक्षण और ई-प्रमाणित प्रति सेवाएँ शुरू कीं।
- इन सेवाओं का उद्देश्य अधिवक्ताओं, वादकारियों और अन्य हितधारकों को न्यायिक अभिलेख तथा प्रमाणित प्रतियाँ सुविधाजनक और तेज़ी से उपलब्ध कराना है।
- ये सेवाएँ व्यापक डिजिटल बदलाव का हिस्सा हैं, जिसमें नए रूप में तैयार एनसीएलटी वेबसाइट और जारी ई-कोर्ट्स 2.0 पहल भी शामिल हैं।
- एनसीएलटी अलग-अलग पीठों से मिले आँकड़ों के आधार पर कार्यभार की समीक्षा और उसका बँटवारा करता है तथा ज़रूरत पर विशेष पीठें बनाता है।
- अप्रैल-जून 2026 में लगभग ₹5,517.66 करोड़ से जुड़ी 78 समाधान योजनाओं को मंज़ूरी मिली, जो दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता लागू होने के बाद पहली तिमाही का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।
6-अक्ष वर्गीकरण
अभ्यास प्रश्न MCQ
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एनसीएलटी के मामले-प्रबंधन उपायों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अप्रैल-जून 2026 में 78 समाधान योजनाओं की मंज़ूरी, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता लागू होने के बाद पहली तिमाही का सबसे कम प्रदर्शन था। 2. एनसीएलटी ने अलग-अलग पीठों में लंबित मामलों की निगरानी के लिए आँकड़ा-आधारित व्यवस्था अपनाई और जुटाए गए आँकड़ों से कार्यभार की समीक्षा तथा उसका बँटवारा किया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा सही है?
कथन 1 गलत है। अप्रैल-जून 2026 में 78 समाधान योजनाओं की मंज़ूरी, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता लागू होने के बाद पहली तिमाही का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन था, सबसे कम नहीं। कथन 2 सही है। अलग-अलग पीठों से जुटाए गए आँकड़ों के आधार पर कार्यभार की समीक्षा और उसका बँटवारा किया गया तथा ज़रूरत पड़ने पर विशेष पीठें बनाई गईं।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एनसीएलटी ने कौन-सी सेवाएँ शुरू कीं?
एनसीएलटी ने ई-निरीक्षण और ई-प्रमाणित प्रति सेवाएँ शुरू कीं।
नई सेवाएँ किन लोगों के लिए हैं?
ये सेवाएँ न्यायिक अभिलेख और प्रमाणित प्रतियाँ पाने वाले अधिवक्ताओं, वादकारियों तथा अन्य हितधारकों के लिए हैं।
एनसीएलटी के डिजिटल बदलाव में और क्या शामिल है?
इसमें नए रूप में तैयार एनसीएलटी वेबसाइट और जारी ई-कोर्ट्स 2.0 पहल शामिल हैं।
अप्रैल-जून 2026 में समाधान योजनाओं पर एनसीएलटी का प्रदर्शन कैसा रहा?
एनसीएलटी ने लगभग ₹5,517.66 करोड़ से जुड़ी 78 समाधान योजनाओं को मंज़ूरी दी। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता लागू होने के बाद पहली तिमाही का यह अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन था।
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