नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मंत्री राम मोहन नायडू की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इसमें भारत में सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) अपनाने और अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन की सीओआरएसआईए व्यवस्था का पालन करने की तैयारियों की समीक्षा हुई। सीओआरएसआईए का अनिवार्य चरण 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा। संबंधित पक्षों को इससे पहले पहचाने गए कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में देशभर में एसएएफ उत्पादन, प्रमाणन और आपूर्ति शृंखला के विकास की प्रगति देखी गई। तेल विपणन कंपनियों की उत्पादन परियोजनाओं की स्थिति और उन्हें चालू करने की समयसीमा की भी समीक्षा हुई। प्रतिभागियों ने 2027 से संभावित मांग के लिए समय पर ईंधन उपलब्ध कराने के आवश्यक उपायों पर चर्चा की।

प्रस्तावित मिश्रण कार्ययोजना में तेल विपणन कंपनियों, विमान सेवाओं और हवाई अड्डा संचालकों की भूमिकाएँ तथा जिम्मेदारियाँ तय की गई हैं। पहली प्राथमिकता 1% सीओआरएसआईए मिश्रण आवश्यकता को सबसे कम लागत में पूरा करना है। चर्चा में आईसीएओ और सीओआरएसआईए के अनुरूप लेखा, निगरानी व प्रतिवेदन ढाँचा; शुरू से अंत तक पता लगाने की सुविधा वाली राष्ट्रीय एसएएफ पंजिका; प्रमाणन और बाजार तक पहुँच आसान करने के उपाय; तथा पूरी सरकार के स्तर पर कार्बन क्रेडिट समायोजन की व्यवस्था भी शामिल थी।

एसएएफ नीति का मसौदा अंतिम चरण में है। सरकार इसके वित्तीय प्रभाव पर विचार करते हुए अंतर-मंत्रालयी परामर्श और संबंधित पक्षों की बैठकें कर रही है। उद्देश्य उत्पादन से हवाई अड्डे तक सबसे कम लागत वाले उपाय पहचानना और यात्रियों व विमान सेवाओं पर यथासंभव कम बोझ रखना है। बैठक में प्राधिकरण पत्र जारी करने और भारत में सीओआरएसआईए-अनुरूप कार्बन बाजार ढाँचा बनाने पर भी विचार हुआ। सरकार ने इन कदमों को घरेलू एसएएफ उत्पादन, मजबूत विमानन व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय विमानन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी से जोड़ा है।