UDISE 2025-26 रिपोर्ट राजस्थान की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती उजागर करती है — बुनियादी सुविधाएं भले सुधरी हों, विद्यार्थियों को प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक विद्यालय में बनाए रखना अब भी कठिन है। कक्षा 1 में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक 100 बच्चों में से केवल 51.8 ही कक्षा 12 तक पहुंच पाते हैं, यानी 48.2 प्रतिशत बच्चे कक्षा 12 से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।

ठहराव दर कक्षा बढ़ने के साथ लगातार गिरती है। कक्षा 1-2 के स्तर पर यह 93.2 प्रतिशत, कक्षा 3-5 में 82.5 प्रतिशत और कक्षा 6-8 में 77 प्रतिशत है, लेकिन माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-12) पर घटकर 51.8 प्रतिशत रह जाती है — रिपोर्ट इसी को सबसे बड़ी चिंता का विषय बताती है।

नामांकन भी लगातार घट रहा है। प्रदेश में कुल नामांकन 2023-24 के 1.67 करोड़ से घटकर 2024-25 में 1.63 करोड़ और 2025-26 में 1.59 करोड़ रह गया, यानी दो वर्षों में लगभग 8.4 लाख विद्यार्थी कम हुए। इनमें 47.56 प्रतिशत विद्यार्थी (74.5 लाख) राजकीय विद्यालयों में तथा 51.65 प्रतिशत (83.8 लाख) निजी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं।

दूसरी ओर बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार दिखता है — 99.2 प्रतिशत विद्यालयों में पेयजल, 92.24 प्रतिशत में बिजली और 94.2 प्रतिशत में बालिका शौचालय उपलब्ध हैं। स्पष्ट है कि अकेली सुविधाएं बच्चों को विद्यालय में टिकाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं रहीं।

शिक्षाविद कुलभूषण कोठारी के अनुसार पढ़ाई छोड़ने का सबसे बड़ा कारण राजकीय विद्यालयों में सीखने की गुणवत्ता का कमजोर होना है; आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पढ़ाई से अपेक्षित लाभ न देखकर बच्चों को काम में लगा देते हैं, और कई विद्यार्थी कौशल आधारित तथा रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की ओर मुड़ रहे हैं — इसलिए शिक्षा और पाठ्यक्रम को रोजगार से जोड़ना जरूरी है। शिक्षाविद व सामाजिक कार्यकर्ता विजय गोयल राजकीय शिक्षा से निजी विद्यालयों की ओर बढ़ते रुझान को नामांकन पर असर डालने वाला एक और कारण मानते हैं।