उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 5 सितंबर 2026 को चेन्नई के इंडिया वाल्व्स 2026 सम्मेलन में इंडिया वाल्व रजिस्ट्री की शुरुआत की। यह सम्मेलन हृदय वाल्व और हृदय की संरचना से जुड़ी बीमारियों के उपचार में प्रगति पर केंद्रित है। इसमें भारत और विदेश के हृदय रोग विशेषज्ञ, हृदय शल्य चिकित्सक, शोधकर्ता तथा स्वास्थ्य पेशेवर शामिल हुए।

रजिस्ट्री कई केंद्रों के सहयोग से चलने वाली पहल है। इसमें भारत भर में कैथेटर के ज़रिए किए जाने वाले हृदय वाल्व उपचार का वास्तविक परिस्थितियों से मिला डेटा व्यवस्थित रूप से जुटाया जाएगा। जानकारी सुरक्षित ढंग से और मरीज़ की पहचान हटाकर रखी जानी है। उद्देश्य भारत से जुड़े उपचार संबंधी साक्ष्यों को मज़बूत करना और मरीज़ों की देखभाल बेहतर बनाना है।

उपराष्ट्रपति ने समझाया कि हृदय वाल्व की प्रक्रिया कराने वाले मरीज़ों, उनके उपचार और बाद के परिणामों का व्यवस्थित रिकॉर्ड व्यक्तिगत चिकित्सकीय अनुभव को साझा चिकित्सा ज्ञान में बदल सकता है। इससे चिकित्सक परिणाम समझ सकते हैं, चुनौतियाँ और कमियाँ पहचान सकते हैं तथा अनुभव से सीखकर देखभाल में सुधार कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कई देशों ने उन्नत वाल्व उपचार और हृदय की अन्य प्रक्रियाओं के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्रियाँ बनाई हैं।

उनके संबोधन में चिकित्सा की प्रगति के साथ उसके लाभ सभी तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी पर भी ज़ोर रहा। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा को मानवाधिकार बताया और कहा कि विकसित भारत का स्वस्थ होना भी ज़रूरी है। रजिस्ट्री का काम साक्ष्य जुटाना और उपचार के परिणामों से सीखना है। इसकी शुरुआत को मरीज़ों की देखभाल में अपेक्षित हर सुधार पहले ही हासिल हो जाने का प्रमाण नहीं समझना चाहिए।