धर्मनिरपेक्षीकरण, नगरीकरण, आधुनिकीकरण, वैश्वीकरण
मुख्य तथ्य
- धर्मनिरपेक्षीकरण (पीटर बर्जर) वह प्रक्रिया है जिसमें धर्म का व्यक्तिगत व्यवहार, सामाजिक संस्थाओं और सार्वजनिक जीवन पर प्रभाव घटता है। भारत संवैधानिक पंथनिरपेक्ष मॉडल अपनाता है
- नगरीकरण: भारत में शहरी जनसंख्या 1951 के 17.3% से 2011 जनगणना में 31.1% तक बढ़ी; 2030 तक 40% अनुमानित।
- आधुनिकीकरण (एस.एन. आइज़ेनस्टैड्ट, 1966) पारंपरिक समाजों का बहुआयामी रूपांतरण है
- वैश्वीकरण विश्वव्यापी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों की गहनता है। WTO (1995) और उदारीकरण (1991) इसके संस्थागत चालक हैं।
- अर्जुन अपादुराई के 5 सांस्कृतिक प्रवाह (मॉडर्निटी एट लार्ज, 1996): एथनोस्केप (लोगों का प्रवाह), मीडियास्केप (मीडिया चित्र), टेक्नोस्केप (तकनीक), फाइने...
मुख्य बिंदु
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धर्मनिरपेक्षीकरण (पीटर बर्जर) वह प्रक्रिया है जिसमें धर्म का व्यक्तिगत व्यवहार, सामाजिक संस्थाओं और सार्वजनिक जीवन पर प्रभाव घटता है। भारत संवैधानिक पंथनिरपेक्ष मॉडल अपनाता है — राज्य न किसी धर्म को बढ़ावा देता है, न भेद (अनुच्छेद 25–28)।
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नगरीकरण: भारत में शहरी जनसंख्या 1951 के 17.3% से 2011 जनगणना में 31.1% तक बढ़ी; 2030 तक 40% अनुमानित। 2023 तक भारत में 4,041 वैधानिक नगर, 3,784 जनगणना नगर और 53 महानगर (≥10 लाख जनसंख्या) हैं।
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आधुनिकीकरण (एस.एन. आइज़ेनस्टैड्ट, 1966) पारंपरिक समाजों का बहुआयामी रूपांतरण है — संरचनात्मक विभेदीकरण, लोकतंत्रीकरण, नगरीकरण, औद्योगीकरण, धर्मनिरपेक्षीकरण, युक्तिसंगतता — जो आधुनिक मूल्यों और तकनीक के प्रसार से प्रेरित है।
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वैश्वीकरण विश्वव्यापी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों की गहनता है। WTO (1995) और उदारीकरण (1991) इसके संस्थागत चालक हैं। भारत का व्यापार-GDP अनुपात 1990 के 14% से 2022 में 42% हो गया।
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अर्जुन अपादुराई के 5 सांस्कृतिक प्रवाह (*मॉडर्निटी एट लार्ज*, 1996): एथनोस्केप (लोगों का प्रवाह), मीडियास्केप (मीडिया चित्र), टेक्नोस्केप (तकनीक), फाइनेंसस्केप (पूंजी), आइडियोस्केप (विचारधाराएँ)। ये असंगत प्रवाह जटिल और गैर-एकरूप वैश्विक संस्कृति बनाते हैं; यह कोई एकरूप "अमेरिकीकरण" नहीं है।
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वेस्टॉक्सिकेशन (ग़र्बज़देगी) — ईरानी दार्शनिक जलाल अल-ए-अहमद (1962) द्वारा गढ़ा गया; इसका अर्थ है पश्चिमी उपभोक्ता संस्कृति एवं मूल्यों का अत्यधिक अनुकरण जिससे गैर-पश्चिमी समाज अपनी स्वदेशी पहचान खो देते हैं।
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ग्लोबल विलेज — मार्शल मैक्लुहान (1962) की अवधारणा: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (टीवी, रेडियो, इंटरनेट) ने स्थान-समय संकुचित कर विश्व को एक एकल समुदाय बनाया है — सभी एक साथ वैश्विक घटनाओं में भागीदार।
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भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता — 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा प्रस्तावना में "पंथनिरपेक्ष" जोड़ा गया। भारत की धर्मनिरपेक्षता = सर्वधर्म समभाव। अनुच्छेद 25 (विवेक की स्वतंत्रता), 26 (धार्मिक संगठनों का अधिकार), 27 (धर्म के लिए कोई कर नहीं), 28 (राज्य-वित्त संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा नहीं)।
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नगरीकरण और मलिन बस्तियाँ: भारत की शहरी वृद्धि ने गहरी असमानताएँ उत्पन्न की हैं — 17.4% शहरी घर मलिन बस्तियों में हैं (2011); मुंबई का धारावी (2.1 वर्ग किमी में ~10 लाख लोग) एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (2015) सभी शहरी गरीबों के लिए आवास का लक्ष्य रखती है।
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आधुनिकीकरण और उसके आलोचक — निर्भरता सिद्धांत: आंद्रे गुंडर फ्रैंक (1967) ने तर्क दिया कि पश्चिमी आधुनिकीकरण सिद्धांत वैचारिक है — यह औपनिवेशिक संरचनाओं को अनदेखा करता है जो विकासशील देशों को अल्पविकास में रखती हैं। भारत में आंशिक आधुनिकीकरण है: शहरी अभिजात वर्ग प्रथम-विश्व जैसी जीवनशैली जीता है, ग्रामीण/जनजातीय जनसंख्या परंपरागत ढाँचे में रहती है।
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ग्लोकलाइज़ेशन — समाजशास्त्री रोलैंड रॉबर्टसन (1992): वैश्वीकरण एकरूप वैश्विक संस्कृति नहीं बनाता; बल्कि वैश्विक प्रक्रियाएँ स्थानीय संस्कृतियों द्वारा अनुकूलित होकर संकर परिणाम देती हैं। उदाहरण: मैकडॉनल्ड्स इंडिया में मैकआलू टिक्की, बॉलीवुड में हॉलीवुड शैली का समावेश, योग का वैश्विक फिटनेस अभ्यास बनना।
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राजस्थान में नगरीकरण: राजस्थान की शहरी जनसंख्या 2001 के 23.4% से 2011 जनगणना में 24.9% हुई — राष्ट्रीय औसत 31.1% से कम, जो राज्य के कृषि-प्रधान स्वरूप को दर्शाता है। जयपुर एकमात्र महानगर (30.7 लाख, 2011) है; राज्य में 184 शहरी स्थानीय निकाय हैं। जयपुर-दिल्ली कॉरिडोर के आसपास तेज़ नगरीकरण और औद्योगिक विकास दिखता है।
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परिचय एवं संदर्भ
यह विषय व्यापक सामाजिक परिवर्तन की चार प्रमुख प्रक्रियाओं को एक साथ प्रस्तुत करता है — धर्मनिरपेक्षीकरण, नगरीकरण, आधुनिकीकरण और वैश्वीकरण। ये चारों परस्पर गहराई से जुड़ी हैं: नगरीकरण धर्मनिरपेक्षीकरण को तीव्र करता है; आधुनिकीकरण वैश्वीकरण के लिए संरचनात्मक परिस्थितियाँ बनाता है; वैश्वीकरण पारंपरिक मूल्यों को चुनौती देता है और प्रतिक्रियाशील आंदोलनों को जन्म देता है। परीक्षा में इस विषय को अलग-अलग परिभाषाओं की तरह नहीं, बल्कि भारत और राजस्थान के सामाजिक परिवर्तन की संयुक्त कहानी की तरह पढ़ना ज़्यादा उपयोगी है।
RPSC परीक्षक के दृष्टिकोण से, इस विषय में निम्नलिखित पर ध्यान दिया जाता है:
- भारत-विशिष्ट आँकड़े (शहरी जनसंख्या, व्यापार के आँकड़े)
- नामित सिद्धांतकार (मैकलुहान, अप्पादुरई, बर्जर, आइजेनस्टैड)
- संवैधानिक पहलू (भारतीय धर्मनिरपेक्षता)
- पिछले वर्षों की अवधारणाएँ: वैश्विक ग्राम (2021), पश्चिमामोह (2023), अप्पादुरई के सांस्कृतिक प्रवाह (2023)
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
15Mग्लोबल विलेज क्या है? इसे किसने प्रस्तावित किया और भारत के लिए इसका क्या अर्थ है?
मॉडल उत्तर
मार्शल मैक्लुहान (1962) ने ग्लोबल विलेज की अवधारणा दी — इलेक्ट्रॉनिक मीडिया स्थान-समय संकुचित कर विश्व को एकल समुदाय बनाता है। भारत में 2023 तक 70 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता; COVID-19 या यूक्रेन युद्ध जैसी घटनाएँ भारतीय बाजार, आपूर्ति श्रृंखला और जनमत को तुरंत प्रभावित करती हैं — वास्तविक वैश्विक अन्तर्निर्भरता का प्रमाण।**
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