हिंदी — समास एवं समास-विग्रह
मुख्य तथ्य
- पटवार सामान्य हिंदी में समस्त या सामासिक पद बनाना और समास-विग्रह करना, दोनों दिशाओं का अभ्यास जरूरी है।
- समास में दो या अधिक सार्थक शब्द छोटा पद बनाते हैं, पर उनके बीच का संबंध बचा रहता है।
- समास-विग्रह समस्त पद को सार्थक घटक शब्दों में खोलकर छिपे संबंध को स्पष्ट करता है।
- अव्ययीभाव में पहला पद प्रायः अव्यय-जैसा होता है और पूरा पद अव्ययी अर्थ देता है, जैसे यथाशक्ति।
- तत्पुरुष में सामान्यतः दूसरा पद प्रधान होता है और का, से, में जैसे कारक-संबंध छिपे रहते हैं।
मुख्य बिंदु
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पटवार सामान्य हिंदी में समस्त या सामासिक पद बनाना और समास-विग्रह करना, दोनों दिशाओं का अभ्यास जरूरी है।
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समास में दो या अधिक सार्थक शब्द छोटा पद बनाते हैं, पर उनके बीच का संबंध बचा रहता है।
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समास-विग्रह समस्त पद को सार्थक घटक शब्दों में खोलकर छिपे संबंध को स्पष्ट करता है।
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अव्ययीभाव में पहला पद प्रायः अव्यय-जैसा होता है और पूरा पद अव्ययी अर्थ देता है, जैसे यथाशक्ति।
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तत्पुरुष में सामान्यतः दूसरा पद प्रधान होता है और का, से, में जैसे कारक-संबंध छिपे रहते हैं।
- 6
कर्मधारय में दोनों पद एक ही वस्तु का वर्णन करते हैं, जैसे नीलकमल का विग्रह नीला कमल।
- 7
द्विगु में संख्या से समूह या गिने हुए पूरे का अर्थ बनता है, जैसे त्रिलोक।
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द्वंद्व में दोनों पद बराबर होते हैं और विग्रह सामान्यतः और या या से खुलता है।
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बहुव्रीहि में पद किसी बाहरी व्यक्ति या वस्तु को बताता है, जिसका संकेत जिसका, जिसके या जिसकी से मिलता है।
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तत्पुरुष और कर्मधारय का मुख्य फर्क छिपे कारक-संबंध और सीधे वर्णन का है।
- 11
द्विगु और द्वंद्व का मुख्य फर्क संख्या-आधारित समूह और बराबर पदों की जोड़ी का है।
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सही समस्त पद संबंध शब्द हटाता है, लेकिन मूल अर्थ-संबंध को नहीं बदलता।
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वस्तुनिष्ठ प्रश्न में प्रकार चुनने से पहले मन में सबसे छोटा सही विग्रह बनाना चाहिए।
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कोई विग्रह व्याकरण से ठीक दिख सकता है, फिर भी गलत होगा यदि वह मूल पद, संबंध या अर्थ बदल दे।
पटवार परीक्षा में समास को कैसे पढ़ना चाहिए?
पटवार परीक्षा में समास को संबंध और अर्थ पहचानकर पढ़ना चाहिए, क्योंकि प्रश्न समस्त पद, समास-विग्रह और प्रकार-निर्णय तीनों रूपों में आ सकते हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की पटवार संशोधित विज्ञप्ति के अनुसार इस भर्ती में कुल ३७०५ पद हैं, इसलिए छोटे व्याकरणिक विषय में भी तेज और सटीक अभ्यास जरूरी है।
समास हिंदी व्याकरण की वह प्रक्रिया है जिसमें दो या अधिक सार्थक शब्द मिलकर छोटा और घना पद बना लेते हैं। इस बने हुए पद को समस्त पद या सामासिक पद कहते हैं। उस समस्त पद को फिर से अर्थपूर्ण शब्दों में खोलना समास-विग्रह कहलाता है। पटवार सामान्य हिंदी में यह केवल परिभाषा याद करने वाला विषय नहीं है। पाठ्यक्रम में समस्त या सामासिक पद बनाना और समास-विग्रह करना साफ रूप से शामिल है, और पटवार के पुराने वस्तुनिष्ठ प्रश्नों से संकेत मिलता है कि समास की पहचान, सही विग्रह और सही समस्त पद सीधे पूछे जा सकते हैं। इसलिए अभ्यर्थी को तीन काम तेजी से आने चाहिए: पद पहचानना, उसका सही विग्रह करना और जरूरत पड़ने पर समास का प्रकार बताना।
समास को समझने का सरल तरीका है: संबंध बचाकर संक्षेप करना। जैसे राजा का पुत्र संक्षेप होकर राजपुत्र बनता है। यहाँ राजा और पुत्र केवल पास-पास नहीं रखे गए हैं, बल्कि दोनों के बीच संबंध है। नीला कमल संक्षेप होकर नीलकमल बनता है, जहाँ पहला शब्द दूसरे की विशेषता बता रहा है। माता और पिता मिलकर माता-पिता बनते हैं, जहाँ दोनों शब्द बराबर महत्त्व रखते हैं। लंबा है उदर जिसका से लंबोदर बनता है, जहाँ अर्थ पद के भीतर के उदर पर नहीं, किसी ऐसे व्यक्ति पर जाता है जिसका उदर लंबा है। इन उदाहरणों से साफ है कि समास केवल शब्द जोड़ने की यांत्रिक क्रिया नहीं है। असली कुंजी संबंध और अर्थ है।
परीक्षा में प्रश्न कई रूपों में आ सकता है। कभी यथाशक्ति जैसा पद देकर उसका सही विग्रह पूछा जाएगा। कभी जितनी शक्ति हो उसके अनुसार जैसी बात देकर सही समस्त पद पूछा जाएगा। कभी पूछा जाएगा कि दिया गया पद तत्पुरुष, कर्मधारय, द्वंद्व, द्विगु, अव्ययीभाव या बहुव्रीहि में से कौन-सा है। कई बार गलत जोड़ी या अलग विकल्प भी पूछा जाता है। ऐसे प्रश्नों में पहले यह देखना चाहिए कि कौन-सा पद प्रधान है: पहला, दूसरा, दोनों, संख्या से बना समूह, या कोई बाहरी अर्थ।
दो सावधानियाँ बहुत जरूरी हैं। पहली, हिंदी के उदाहरण को मन में अंग्रेजी में बदलकर हल न करें। देवनागरी पद को सामने रखकर उसका स्वाभाविक हिंदी विग्रह करें। दूसरी, केवल ऊपर से दिखने वाले संकेत पर भरोसा न करें। शुरू में संख्या हो तो द्विगु की संभावना बनती है, पर हर संख्या वाला पद बिना जांच के द्विगु नहीं होगा। और से खुलने वाली जोड़ी प्रायः द्वंद्व होती है, पर यदि वही जोड़ी किसी तीसरे व्यक्ति की विशेषता बताए तो बहुव्रीहि की ओर जा सकती है। विशेषण जैसा पद कर्मधारय हो सकता है, पर कारक-संबंध वाला पद तत्पुरुष होगा।
इस पाठ की कामचलाऊ परिभाषा यह रखें: समास में विभक्ति, संयोजक या व्याख्यात्मक शब्द हटाकर छोटा पद बनाया जाता है, पर मूल शब्दों के बीच का संबंध बचा रहता है। समास-विग्रह उसी छिपे संबंध को फिर से स्पष्ट करता है। सही उत्तर वही है जो शब्दों को भी बचाए और उनके अभिप्रेत संबंध को भी। यदि विग्रह व्याकरण की दृष्टि से ठीक दिखता है, पर संबंध बदल देता है, तो परीक्षा के लिए वह गलत है।
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