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व्यवहार एवं विधि

मुख्य बिंदु

बुद्धि: संज्ञानात्मक, सामाजिक, भावनात्मक, सांस्कृतिक, प्रशंसात्मक, आध्यात्मिक

पेपर III · इकाई 3 अनुभाग 1 / 13 PYQ-शैली 23 मिनट

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मुख्य बिंदु

  1. बुद्धि पर्यावरण से प्रभावी ढंग से निपटने, उद्देश्यपूर्ण कार्य करने और तर्कसंगत सोचने की सामान्य क्षमता है — डेविड वेक्सलर (१९४४) की परिभाषा।

  2. चार्ल्स स्पीयरमैन (१९०४) ने सामान्य बुद्धि और विशिष्ट बुद्धि कारकों का सिद्धांत दिया; बुद्धि की एकात्मक अवधारणा। सभी मानसिक क्षमताओं में एक सामान्य कारक विद्यमान।

  3. हावर्ड गार्डनर (१९८३) ने ९ प्रकार की बुद्धि प्रस्तावित की — भाषाई, तार्किक-गणितीय, स्थानिक, संगीतात्मक, शारीरिक-गतिसंबंधी, अंतर्वैयक्तिक, अंतःवैयक्तिक, प्रकृतिवादी, अस्तित्वगत।

  4. संज्ञानात्मक बुद्धि ध्यान, स्मृति, तर्कशक्ति, समस्या-समाधान और भाषा की क्षमता है। बिने-सिमॉन (१९०५) ने पहला बुद्धि परीक्षण बनाया; टर्मन (१९१६) ने सूत्र दिया: बुद्धि लब्धि = (मानसिक आयु / कालानुक्रमिक आयु) × १००।

  5. सामाजिक बुद्धि सामाजिक स्थितियों में दूसरों को समझने और प्रबंधित करने की क्षमता है — थॉर्नडाइक (१९२०); बाद में कैन्टर एवं किहलस्ट्रोम (१९८७) ने इसे सामाजिक ज्ञान और सामाजिक कौशल तक विस्तारित किया।

  6. भावनात्मक बुद्धिसालोवे और मेयर (१९९०) ने प्रस्तुत की; गोलमैन (१९९५) ने ५ घटक दिए: आत्म-जागरूकता, आत्म-नियमन, अभिप्रेरणा, सहानुभूति, सामाजिक कौशल।

  7. सांस्कृतिक बुद्धिअर्ली एवं आंग (२००३) — सांस्कृतिक विविधता में प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता; ४ आयाम: प्रेरक, संज्ञानात्मक, मेटाकॉग्निटिव, व्यवहारात्मक।

  8. प्रशंसात्मक बुद्धिथैचेनकेरी एवं मेट्जकर (२००६) — वर्तमान स्थिति में सकारात्मक संभावनाएँ देखकर बेहतर भविष्य बनाने की क्षमता; संगठनों में प्रशंसात्मक जाँच से जुड़ी।

  9. आध्यात्मिक बुद्धिज़ोहर एवं मार्शल (२०००) — अर्थ और मूल्य समस्याओं को सुलझाने की क्षमता; धार्मिक विश्वास से अलग। एमन्स (२०००) ने ५ आध्यात्मिक बुद्धि क्षमताएँ बताईं।

  10. भारतीय परंपरा में बुद्धि बहुआयामी है — प्रज्ञा (विवेक), बुद्धि (संज्ञानात्मक विवेक), मेधा (ग्रहण शक्ति), धी (दिव्य बुद्धि) अलग-अलग फलक हैं। कौटिल्य की अन्वीक्षिकी तर्कशक्ति और व्यावहारिक विवेक दोनों को महत्त्व देती है।

  11. स्मृति के तीन चरण: संवेदी स्मृति (१ सेकंड से कम), अल्पकालिक/कार्यशील स्मृति (७±२ इकाइयाँ; जॉर्ज मिलर, १९५६) और दीर्घकालिक स्मृति (असीमित; शब्दार्थ, प्रसंगात्मक, प्रक्रियात्मक)। बुद्धि कुशल कूटबद्धन और पुनःप्राप्ति से जुड़ी है।

  12. कोल्ब का अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत (१९८४) ४ शैलियाँ बताता है — विचलन, आत्मसातकरण, अभिसरण, समायोजन। विश्लेषणात्मक शैली अमूर्त संकल्पना में; सक्रिय शैली व्यावहारिक कार्यों में श्रेष्ठ।