सार्वजनिक अनुभाग प्रीव्यू
मुख्य बिंदु
इस नोट के मुख्य बिंदु भारत की उन जवाबदेही और विनियामक संस्थाओं को साथ रखकर समझाते हैं जिनसे भर्ती, चुनाव, लेखापरीक्षण, वित्तीय बँटवारा, भ्रष्टाचार-नियंत्रण और नीति-निर्माण जुड़े हैं। राजस्थान लोक सेवा आयोग के आरएएस प्रारंभिक परीक्षा २०२४ पाठ्यक्रम में सामान्य ज्ञान और सामान्य विज्ञान का पेपर २०० अंकों तथा १५० बहुविकल्पीय प्रश्नों का बताया गया है, इसलिए इन संस्थाओं के संक्षिप्त तथ्य सीधे परीक्षा-योग्य हैं।
संघ लोक सेवा आयोग अनुच्छेद ३१५ के तहत संवैधानिक निकाय है; अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं; अनुच्छेद ३१७ के तहत केवल उच्चतम न्यायालय की जाँच पर पद से हटाया जा सकता है।
भारत निर्वाचन आयोग — अनुच्छेद ३२४ द्वारा चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण; २०२३ संशोधन से चयन समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री एवं विपक्ष के नेता।
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक — अनुच्छेद १४८; राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त; सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश की तरह हटाया जाए; डॉ. अंबेडकर ने इसे संविधान के अंतर्गत "सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अधिकारी" कहा।
वित्त आयोग — अनुच्छेद २८०; प्रत्येक ५ वर्ष पर; १५वें वित्त आयोग (एन.के. सिंह, २०२०–२१ तथा २०२१–२६) ने राज्यों को विभाज्य कर-पूल का ४१% अनुशंसित किया।
लोकपाल — लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम २०१३; १ जनवरी २०१४ को राष्ट्रपति की स्वीकृति, १६ जनवरी २०१४ से लागू, और २०१९ में संस्था क्रियाशील रूप से सामने आई; प्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद, ग्रुप ए–डी अधिकारियों की जाँच; प्रथम अध्यक्ष: न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष (२०१९)।
नीति आयोग — जनवरी २०१५ में योजना आयोग का स्थान लिया; प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष; यह संवैधानिक या सांविधिक निकाय नहीं — कार्यकारी आदेश द्वारा; वित्तीय आवंटन शक्ति नहीं; सहकारी संघवाद पर बल।
राज्य लोक सेवा आयोग — अनुच्छेद ३१५; राज्यपाल नियुक्त, किंतु हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति को; अनुच्छेद ३२३ — संयुक्त लोक सेवा आयोग का प्रावधान।
आदर्श आचार संहिता — चुनाव आयोग द्वारा चुनाव घोषणा से लागू; विधिक नहीं किंतु अनुच्छेद ३२४ से बल; नई योजनाओं व सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर रोक।
द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (२००५–०८), अध्यक्ष वीरप्पा मोइली, ने निर्धारित समय-सीमा में केंद्र में लोकपाल और सभी राज्यों में लोकायुक्त की सिफारिश की; नागरिक चार्टर को कानूनी आधार देने पर बल।
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के तीन लेखापरीक्षा कार्य: (क) नियमितता/अनुपालन — नियमानुसार व्यय; (ख) विनियोग — संसद-अनुमोदित अनुदान; (ग) निष्पादन/कार्यकुशलता — परिणाम मूल्यांकन; लोक लेखा समिति नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट पर आधारित।
अनुच्छेद २८० के अंतर्गत वित्त आयोग का दायित्व: (क) कर-राजस्व वितरण; (ख) अनुच्छेद २७५ के तहत अनुदान; (ग) पंचायत/नगरपालिका के लिए राज्य-निधि संवर्धन; (घ) राष्ट्रपति-निर्दिष्ट अन्य मामले।
