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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

मुख्य बिंदु

जलवायु कूटनीति: कॉप, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और मिशन लाइफ

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मुख्य बिंदु

मुख्य बिंदु यह हैं कि जलवायु कूटनीति में यूएनएफसीसीसी, पेरिस समझौता, राष्ट्रीय निर्धारित योगदान, कॉप शिखर सम्मेलन, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और मिशन लाइफ भारत की परीक्षा-दृष्टि से सबसे ज़रूरी कड़ियाँ हैं।

१. यूएनएफसीसीसी (संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन ढाँचा संधि)

  • १९९२ के रियो पृथ्वी सम्मेलन में हस्ताक्षरित, १९९४ में लागू हुआ
  • १९८ पक्षकारों के साथ मूलभूत अंतर्राष्ट्रीय जलवायु संधि
  • मुख्यालय: बॉन, जर्मनी
  • वार्षिक कॉप (पक्षकार सम्मेलन) इसका सर्वोच्च निर्णय-निर्माण निकाय है

२. पेरिस समझौता (कॉप२१, दिसंबर २०१५, पेरिस)

  • सभी पक्षकारों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि
  • पूर्व-औद्योगिक स्तरों से २ डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे वैश्विक तापन सीमित करने की प्रतिबद्धता
  • १.५ डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की कोशिश जारी रखना
  • ४ नवंबर २०१६ को लागू हुआ; २७ जनवरी २०२६ के बाद इसके १९४ पक्षकार हैं

३. राष्ट्रीय निर्धारित योगदान

  • प्रत्येक देश अपनी जलवायु कार्य योजना प्रस्तुत करता है — नीचे से ऊपर वाला दृष्टिकोण
  • हर ५ वर्ष में प्रस्तुत करना आवश्यक (२०२०, २०२५, २०३०...)
  • भारत का २०२२ में अपडेट किया गया राष्ट्रीय निर्धारित योगदान: २०३० तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से लगभग ५०% संचयी बिजली स्थापित क्षमता
  • २०३० तक सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में ४५% कमी (२००५ आधार वर्ष से)

४. कॉप२८ (दुबई, संयुक्त अरब अमीरात, नवंबर–दिसंबर २०२३)

  • पहला वैश्विक जायजा पूरा हुआ — पाया कि विश्व १.५ डिग्री सेल्सियस लक्ष्य पर "पटरी पर नहीं" है
  • ऐतिहासिक "जीवाश्म ईंधन से दूर संक्रमण" भाषा स्वीकृत ("चरणबद्ध समाप्ति" नहीं)
  • हानि और क्षति कोष चालू — शुरुआती वचन ७० करोड़ डॉलर से अधिक पहुँचे
  • संयुक्त अरब अमीरात के सुल्तान अल जाबेर ने कॉप२८ की अध्यक्षता की

५. कॉप२९ (बाकू, अज़रबैजान, नवंबर २०२४)

  • नया सामूहिक परिमाणात्मक लक्ष्य पर सहमति
  • विकसित देशों से विकासशील देशों को २०३५ तक ३०० अरब डॉलर प्रति वर्ष
  • मौजूदा १०० अरब डॉलर वचनबद्धता के अतिरिक्त
  • भारत और विकासशील देशों ने १ लाख करोड़ डॉलर प्रति वर्ष की न्यूनतम सीमा के लिए जोरदार मांग की

६. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन

  • भारत और फ्रांस द्वारा कॉप२१ (पेरिस, २०१५) में सह-स्थापित
  • मुख्यालय: गुरुग्राम, भारत; १२०+ सदस्य/हस्ताक्षरकर्ता देश
  • लक्ष्य: २०३० तक १ लाख करोड़ डॉलर सौर निवेश जुटाना
  • उद्देश्य: वैश्विक स्तर पर १,००० गीगावाट सौर क्षमता तैनात करना
  • भारतीय धरती पर मुख्यालय वाला पहला अंतर-सरकारी संगठन

७. आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन

  • भारत ने २०१९ में संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में शुरू किया; ब्रिटेन ने कॉप२६ में इसकी लघु द्वीपीय राज्यों वाली आईआरआईएस पहल में साझेदारी की
  • २०२६ तक गठबंधन में सदस्य देशों और साझेदार संगठनों का दायरा ६० से ऊपर जा चुका है
  • उद्देश्य: अवसंरचना को जलवायु और आपदा जोखिम के प्रति लचीला बनाना
  • मुख्यालय: नई दिल्ली; लघु द्वीपीय विकासशील राज्य पहल शामिल

८. मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली)

  • प्रधानमंत्री मोदी ने कॉप२६ (ग्लासगो, नवंबर २०२१) में विचार रखा; लाइफ अभियान ५ जून २०२२ को शुरू हुआ; मिशन लाइफ २० अक्तूबर २०२२ को केवड़िया, गुजरात में औपचारिक रूप से शुरू हुआ
  • "उपयोग और फेंको" से "घटाओ, पुनः उपयोग करो, पुनः चक्रित करो" जीवनशैली की ओर बदलाव की वकालत
  • व्यक्तियों, समुदायों, व्यवसायों और सरकारों को "धरती-हितैषी लोग" बनने का आह्वान
  • ७ प्रमुख व्यवहारों में ७५ कार्य (ऊर्जा, जल, खाद्य बर्बादी, एकल-उपयोग प्लास्टिक, कचरा, ई-कचरा, स्वस्थ जीवनशैली)

९. पंचामृत प्रतिबद्धताएँ (कॉप२६, नवंबर २०२१)

  • प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित भारत की पाँच जलवायु प्रतिज्ञाएँ
  • (१) २०३० तक ५०० गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता; (२) २०३० तक बिजली की स्थापित क्षमता का लगभग ५०% गैर-जीवाश्म स्रोतों से
  • (३) २०३० तक १ अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड की कमी; (४) २०३० तक ४५% उत्सर्जन तीव्रता में कमी
  • (५) २०७० तक शुद्ध शून्य

१०. हानि और क्षति कोष
- कॉप२७ (शर्म अल-शेख, मिस्र, २०२२) में निर्मित
- अनुकूलन क्षमता से परे हानियों के लिए जलवायु-असुरक्षित देशों को सहायता
- कॉप२८ (दुबई, २०२३) में विश्व बैंक के अंतरिम ट्रस्टी के रूप में चालू

११. भारत की नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्धि
- स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता २०२४-२५ में २०० गीगावाट से ऊपर गई; २०२६ में यह और बढ़ चुकी है
- सौर क्षमता २०२५ में १०० गीगावाट से ऊपर गई; भारत स्थापित नवीकरणीय क्षमता में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों में है
- २०३० तक ५०० गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता लक्ष्य के लिए तेज़ प्रगति
- भारत ने वित्त वर्ष २०२४-२५ में २९.५२ गीगावाट नवीकरणीय क्षमता जोड़ी, जिसमें सौर का हिस्सा सबसे बड़ा था

१२. "साझा किंतु विभेदित जिम्मेदारियाँ एवं संबंधित क्षमताएँ"
- अंतर्राष्ट्रीय जलवायु न्याय का मूलभूत सिद्धांत
- विकसित देशों ने अधिकांश ऐतिहासिक उत्सर्जन किया है और उन्हें शमन एवं वित्त पर अगुवाई करनी चाहिए
- भारत जैसे विकासशील देश विकास का अधिकार बनाए रखते हुए राष्ट्रीय रूप से उपयुक्त कार्रवाई करते हैं