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सीकर

शेखावाटी की खुली कला-वीथिका — चित्रित हवेलियाँ तथा कोचिंग राजधानी

अंतिम सत्यापन: 2026-04-25

सीकर पूर्वोत्तर राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र का सांस्कृतिक केंद्र है, जिसकी स्थापना 17वीं सदी की शुरुआत में राव दौलत सिंह ने की थी। यह जिला अपनी चित्रित हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है — जिसके कारण शेखावाटी को “विश्व की सबसे बड़ी खुली कला-वीथिका” कहा जाता है — खाटू श्यामजी एवं सालासर बालाजी तीर्थ केंद्रों के लिए, तथा कोटा के साथ-साथ चिकित्सा एवं इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के लिए भारत के सबसे बड़े कोचिंग केंद्रों में से एक होने के लिए।

जिला एक नज़र में

स्थापना17वीं सदी की शुरुआत, राव दौलत सिंह द्वारा
क्षेत्रशेखावाटी — राव शेखा के नाम पर (15वीं सदी)
मुख्यालयसीकर शहर
लोकसभा सीटसीकर — सामान्य, 1 सीट
जलवायु (कोपेन)BSh — गर्म अर्ध-शुष्क
किसके लिए प्रसिद्धशेखावाटी चित्रकारी, खाटू श्यामजी, सालासर बालाजी, कोचिंग केंद्र, लक्ष्मणगढ़ किला

इतिहास — प्राचीन → मध्यकालीन → आधुनिक

15वीं सदी का अंत: राव शेखा — आमेर से अलग हुए एक कछवाहा शाखा — ने शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनू, चूरू) में अर्ध-स्वतंत्र संघ की स्थापना की।

17वीं सदी की शुरुआत: राव दौलत सिंह ने सीकर शहर की स्थापना की; सीकर के शेखावत ठाकुरों ने जयपुर राज्य के अधीन सबसे बड़ा ठिकाना संभाला।

18वीं-19वीं सदी: रेशम एवं अफ़ीम कारवाँ मार्ग की समृद्धि ने मारवाड़ी व्यापारी प्रवास को बढ़ाया; सीकर, रामगढ़, फ़तेहपुर, मंडावा, नवलगढ़, मुकुंदगढ़, डूंडलोद एवं बीसाऊ में विस्तृत भित्ति-चित्रों वाली हवेलियाँ बनीं।

1934: सामंती करों के विरुद्ध सीकर प्रजा मंडल आंदोलन (सरदार हरलाल सिंह के साथ) पूर्व-स्वतंत्रता राजपुताना का एक प्रमुख कृषक-राजनीतिक आंदोलन था।

स्वतंत्रता के बाद: 1949 में राजस्थान में विलय; 2000 के दशक से कोचिंग केंद्र के रूप में उभरना, 2010 के बाद एलेन, आकाश और अन्य शृंखलाओं की सीकर शाखाएँ खुलने से तेज़ी।

कला, संस्कृति, विरासत एवं पर्यटन

शेखावाटी भित्ति-चित्र: हवेलियों पर चूना-प्लास्टर भित्ति-चित्र (तकनीक: अराईश एवं पन्नाकारी) जिनमें हिंदू देवताओं, ब्रिटिश तकनीक (रेल, ग्रामोफ़ोन), कृष्ण लीला एवं अश्वारोही दृश्य चित्रित हैं — 18वीं से 20वीं सदी की शुरुआत।

खाटू श्यामजी मंदिर, खाटू (सीकर से 35 किमी): राजस्थान के सबसे बड़े तीर्थस्थलों में से एक — फरवरी-मार्च में फाल्गुन मेला लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। सालासर बालाजी (साथ लगते चूरू में) से निकटता से जुड़ा हुआ है।

किले एवं हवेलियाँ: लक्ष्मणगढ़ किला (1862, पहाड़ी पर), देवगढ़ किला, हर्षनाथ मंदिर (10वीं सदी का शैव), जीण माता मंदिर। मंडावा, फ़तेहपुर एवं नवलगढ़ हवेली परिपथ एक दिन की दूरी पर हैं।

शिल्प: शेखावाटी पाग (पगड़ी), बंधेज, कसीदाकारी, ताम्र-पीतल बर्तन। लोक रूप: चंग नृत्य (होली पर, ढप ढोल लिए पुरुष), कच्छी घोड़ी।

भूगोल, जलवायु एवं पारिस्थितिकी

पूर्वोत्तर राजस्थान; अरावली शृंखला और थार रेगिस्तान के बीच संक्रमण क्षेत्र। जलवायु BSh; ग्रीष्म 22–46 °C, शीत 2–24 °C; वर्षा लगभग 450–500 मिमी।

मिट्टी: अरावली तलहटी में बलुई-दोमट, पश्चिमी तहसीलों में बलुई। खंडेला पहाड़ियाँ पूर्वी सीमा निर्धारित करती हैं; हर्ष पहाड़ी (~960 मीटर) एक प्रसिद्ध शिखर है।

अपवाह: कांतली नदी (अल्पकालिक) मध्य क्षेत्र का जल निकासी करती है। कोई बारहमासी नदी नहीं; भूजल मुख्य स्रोत है और कई ब्लॉकों में अति-दोहित है।

खनिज संपदा: चूना पत्थर, संगमरमर, ताँबा (खेतड़ी पट्टी पड़ोसी झुंझुनू से विस्तारित).

अर्थव्यवस्था — क्षेत्र, उद्योग, ऊर्जा

कोचिंग उद्योग: 2010 के दशक से सीकर NEET, JEE और SSC कोचिंग के लिए कोटा के कम लागत वाले विकल्प के रूप में उभरा — एलेन, आकाश और करियर पॉइंट की सीकर में बड़ी शाखाएँ हैं; अनुमानित वार्षिक छात्र आगमन दसियों हज़ारों में।

कृषि: बाजरा, गेहूँ, सरसों, जौ, चना, नहरी क्षेत्र में सब्ज़ियाँ; बागवानी — प्याज़, लहसुन, किन्नू।

व्यापार एवं वाणिज्य: यहाँ की मारवाड़ी व्यापारी शृंखलाओं ने स्वतंत्रता-पूर्व भारत के अधिकांश उद्योग का निर्माण किया — बिड़ला, गोयनका, पोद्दार, सिंघानिया परिवारों की शेखावाटी से उत्पत्ति है। खंडेलवाल, लोहिया एवं मोदी व्यापारी कुल सीकर शहर में केंद्रित हैं।

पर्यटन: मंडावा, नवलगढ़, फ़तेहपुर (होटल नदीन ले प्रिंस में बड़ी फ्रेंच-इंडियन भित्ति पुनरुद्धार परियोजना) में विरासत हवेली परिपथ, खाटू श्यामजी तीर्थ पर्यटन।

राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरचना

सीकर लोकसभा एक सामान्य सीट है। जिला विधानसभा में 8 विधायक भेजता है — सीकर, लक्ष्मणगढ़, धोद (SC), खंडेला, नीम का थाना (2023 के बाद नए नीम-का-थाना जिले में, राजपत्र की जाँच करें), श्री माधोपुर, दाँतारामगढ़, फ़तेहपुर (साथ लगते फ़तेहपुर शेखावाटी / जाँचें).

पुनर्गठन पर ध्यान दें: नीम-का-थाना मार्च 2023 में नए जिले के रूप में अलग किया गया और दिसंबर 2024 में बाद की राज्य सरकार ने इसे विघटित कर दिया — तहसील संख्या उद्धृत करने से पहले नवीनतम राजस्थान जिला राजपत्र की जाँच करें।

शासन पहल एवं योजनाएँ (2025-26)

मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना: SC/ST/EWS सीकर छात्रों के लिए मुफ़्त प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग — स्थानीय कोचिंग पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ उठाती है।

खाटू श्यामजी मास्टर प्लान एवं फाल्गुन मेला प्रबंधन — देवस्थान विभाग + सीकर जिला प्रशासन; पार्किंग, स्वच्छता एवं भीड़-प्रवाह पर बड़े पूँजीगत कार्यों की घोषणा राजस्थान बजट 2025-26 में।

एडॉप्ट-ए-हेरिटेज 2.0: चयनित शेखावाटी हवेलियाँ और मंडावा/नवलगढ़ परिपथ विरासत पर्यटन कार्यक्रम के अंतर्गत। PM-KUSUM सीकर जिले में सौर कृषि पंप।

PYQ एक-पंक्ति (RAS / RPSC / RSSB)

किसी भी परीक्षा उपयोग से पहले सटीक विकल्पों की जाँच आधिकारिक RPSC / RSSB प्रश्न पत्रों से करें।

RPSC

Q. खाटू श्यामजी मंदिर किस जिले में है?

उ. सीकर

RPSC

Q. शेखावाटी क्षेत्र का नाम पड़ा —

उ. राव शेखा (15वीं सदी के कछवाहा शाखा)

RAS Mains

Q. 1934 के सीकर प्रजा मंडल आंदोलन का नेतृत्व किया —

उ. सरदार हरलाल सिंह

RPSC

Q. हर्षनाथ मंदिर किस राजवंश से जुड़ा है?

उ. 10वीं सदी के चौहान / पूर्व-चौहान शैव परंपरा

हाल की घटनाएँ — सीकर

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स्वयं को परखें — 10 प्रश्न

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प्रश्न 1 / 10

खाटू श्यामजी मंदिर किस जिले में स्थित है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेखावाटी की हवेलियाँ क्यों प्रसिद्ध हैं?

शेखावाटी की हवेलियाँ (18वीं से 20वीं सदी की शुरुआत) चूना-प्लास्टर पर भित्ति चित्रों के विश्व के सर्वाधिक सघन संग्रहों में से एक हैं — हिंदू पुराण, औपनिवेशिक तकनीक, अश्वारोही दृश्य एवं कृष्ण लीला चित्रित करती हैं। मंडावा, नवलगढ़, फ़तेहपुर, रामगढ़ एवं बीसाऊ शहर मुख्य परिपथ बनाते हैं; इस क्षेत्र को कभी-कभी विश्व की सबसे बड़ी खुली कला-वीथिका कहा जाता है।

सीकर कोचिंग केंद्र क्यों है?

सीकर 2010 के दशक से NEET / JEE / SSC कोचिंग के लिए कोटा के कम लागत वाले विकल्प के रूप में बढ़ा, स्थापित स्कूली एवं व्यापारी पारिस्थितिकी तंत्र और कम हॉस्टल किराए के समर्थन से। प्रमुख शृंखलाओं (एलेन, आकाश, करियर पॉइंट) के सीकर में पूर्ण परिसर हैं, जो प्रतिवर्ष दसियों हज़ारों छात्रों को आकर्षित करते हैं।

खाटू श्यामजी का क्या महत्व है?

खाटू श्यामजी (सीकर से 35 किमी) उत्तर भारत के सर्वाधिक दर्शनीय कृष्ण-बर्बरीक तीर्थस्थलों में से एक है। फरवरी-मार्च में फाल्गुन मेला लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है और राजस्थान के सबसे बड़े धार्मिक जमावड़ों में है; देवस्थान विभाग भीड़ प्रबंधन के लिए बड़े पूँजीगत उन्नयन देखता है।