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अपना जिला जानें

प्रतापगढ़

कांठल पठार का जिला, जहां थेवा शिल्प, सीतामाता अभयारण्य और अनुसूचित जनजाति सीटें प्रमुख पहचान हैं

अंतिम सत्यापन: 2026-05-06

प्रतापगढ़ राजस्थान के दक्षिण-पूर्व में अरावली पर्वतमाला और मालवा पठार के मिलन क्षेत्र में स्थित है। 26 जनवरी 2008 को चित्तौड़गढ़, उदयपुर और बांसवाड़ा के हिस्सों से इसे राजस्थान का 33वां जिला बनाया गया। परीक्षा की दृष्टि से यह जिला थेवा शिल्प, सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य, कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था और अनुसूचित जनजाति विधानसभा क्षेत्रों के कारण खास है।

जिला एक नज़र में

जिला गठन26 जनवरी 2008; राजस्थान का 33वां जिला
क्षेत्रफल4,448.99 वर्ग किलोमीटर
जनसंख्या2011 की जनगणना में 8,67,848
मुख्यालयप्रतापगढ़ तहसील
जनसंख्या घनत्व195 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
लिंगानुपातप्रति 1,000 पुरुषों पर 983 महिलाएं
प्रशासनिक इकाइयां5 उपखंड, 5 तहसील और 5 पंचायत समितियां

जिला प्रशासन

वर्तमान पदाधिकारी — सार्वजनिक अभिलेखों से।

जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर

श्रीमती शुभम चौधरी

प्रतापगढ़ जिला

पुलिस अधीक्षक

श्री बी आदित्य

प्रतापगढ़ जिला

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट

श्री विजयेश कुमार पंड्या

प्रतापगढ़ जिला

जिला एवं सत्र न्यायाधीश

सुश्री आशा कुमारी

प्रतापगढ़ न्यायक्षेत्र

2025 से

लोकसभा सांसद

श्री चंद्र प्रकाश जोशी

चित्तौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2024 से

विधायक

श्री हेमन्त मीणा

प्रतापगढ़ अनुसूचित जनजाति विधानसभा क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2023 से

इतिहास — प्राचीन → मध्यकालीन → आधुनिक

कांठल नगरी

रियासती दौर में प्रतापगढ़ कांठल नगरी के नाम से जाना जाता था।

प्रताप सिंह वंश

प्रतापगढ़ नाम महारावत प्रताप सिंह से जुड़ा है, जो राजकुमार सूरजमल की दसवीं पीढ़ी के वंशज थे।

देवलिया राजधानी

प्रतापगढ़ के राजधानी बनने से पहले रियासत की राजधानी देवलिया या देवगढ़ थी।

घोघरिया खेड़ा नगर

महारावत प्रताप सिंह ने घोघरिया खेड़ा के मैदानी क्षेत्र में प्रतापगढ़ नगर बसाया।

देवलिया राज्य स्थापना

सूरजमल के प्रपौत्र बिक्रम सिंह रावत ने 1561 में देवलिया राज्य की स्थापना की।

प्रतापगढ़ नगर स्थापना

महारावत प्रताप सिंह ने 1689-1699 के दौरान नए प्रतापगढ़ नगर का निर्माण शुरू कराया और उसका नाम प्रतापगढ़ रखा।

शासक उत्तराधिकार

क्षेमकर्ण से अंतिम शासक अंबिका प्रताप सिंह तक प्रतापगढ़ पर इक्कीस राजाओं ने शासन किया।

अंतिम शासक

1940 से 1948 तक शासन करने वाले अंबिका प्रताप सिंह प्रतापगढ़ के अंतिम शासक थे।

राजस्थान संघ विलय

प्रतापगढ़ रियासत भारतीय संघ में शामिल होकर 25 मार्च 1948 को राजस्थान संघ का हिस्सा बनी।

प्रारंभिक जिला दर्जा

1948 से 1952 तक प्रतापगढ़ स्वतंत्र जिला रहा; बाद में पहले निंबाहेड़ा जिले और फिर चित्तौड़गढ़ में मिला दिया गया।

जिला गठन

वर्तमान प्रतापगढ़ जिला चित्तौड़गढ़, उदयपुर और बांसवाड़ा जिलों के हिस्सों से बनाया गया।

तहसील सम्मिलन

चित्तौड़गढ़ की प्रतापगढ़, छोटी सादड़ी और अरनोद तहसीलों को नए प्रतापगढ़ जिले में जोड़ा गया।

कला, संस्कृति, विरासत एवं पर्यटन

थेवा आभूषण

प्रतापगढ़ की थेवा नामक हस्तशिल्प आभूषण परंपरा दूर-दूर तक पहचानी जाती है।

कांच मीनाकारी

थेवा में रंगीन कांच पर सोने की पारंपरिक नक्काशी और चित्रांकन के साथ मीनाकारी आभूषण बनाए जाते हैं।

थेवा सजावट

थेवा कला अब आभूषणों से आगे बढ़कर उपयोगी सजावटी वस्तुओं तक फैल रही है।

धार्मिक मेले

प्रतापगढ़ के प्रमुख मेलों में वैशाख पूर्णिमा का गौतमेश्वर मेला और हनुमान जयंती का शौली हनुमान मेला शामिल हैं।

स्थानीय मेले

जिले में सीता माता मेला, भंवर माता मेला और शौली हनुमानजी मेला भी स्थानीय आस्था और मेलों की परंपरा से जुड़े हैं।

भील नृत्य

प्रतापगढ़ के भील समुदाय में संगीत और नृत्य का विशेष लगाव दिखता है; उनके नृत्य लयदार और ऊर्जावान माने जाते हैं।

जनजातीय नृत्य

प्रतापगढ़ के जनजातीय समाज में विवाह-नृत्य, घन्ना या घेर नृत्य, नेजा नृत्य और गौरी नृत्य लोकप्रिय हैं।

घूमर परंपरा

घूमर में महिलाएं रंग-बिरंगे घाघरे पहनकर गोल घेरा बनाती हैं और नवरात्र तथा गणगौर पर डंडों या लकड़ी की तलवारों के साथ ताल देती हैं।

गेर नृत्य

गेर नृत्य की जड़ें भील जनजातीय नृत्य परंपरा में मानी जाती हैं और यह आम तौर पर जन्माष्टमी तथा होली के अवसर पर किया जाता है।

नेजा नृत्य

प्रतापगढ़ जिले का टांडा गांव नेजा नृत्य के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

गौरी नृत्य

भाद्रपद मास में देवी पार्वती के सम्मान में गौरी नृत्य किया जाता है।

पर्यटन मेला

प्रतापगढ़ में पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन के सहयोग से हर साल दो दिन का मेला आयोजित करता है।

भूगोल, जलवायु एवं पारिस्थितिकी

राजस्थान में स्थिति

प्रतापगढ़ राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है।

राजस्थान के पड़ोसी

जिले की राजस्थान में सीमाएं चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों से लगती हैं।

अंतरराज्यीय सीमा

प्रतापगढ़ की अंतरराज्यीय सीमा मध्य प्रदेश के नीमच, मंदसौर और रतलाम जिलों से जुड़ती है।

अरावली मालवा संगम

यह जिला अरावली पर्वतमाला और मालवा पठार के संगम क्षेत्र में स्थित है।

ऊबड़-खाबड़ भू-आकृति

मालवा पठार, विंध्याचल पहाड़ियों और अरावली पर्वतमाला के मिलने से प्रतापगढ़ की भू-आकृति ऊबड़-खाबड़ है।

औसत ऊंचाई

गजेटियर के स्थलाकृति विवरण में जिले की औसत ऊंचाई समुद्र तल से 580 मीटर बताई गई है।

नदी-समृद्ध क्षेत्र

प्रतापगढ़ राजस्थान के उन चुनिंदा क्षेत्रों में है जहां नदियों से पानी की उपलब्धता अपेक्षाकृत अच्छी रहती है।

प्रमुख नदियां

प्रतापगढ़ जिले की जल-निकासी में माही, जाखम और सिवन प्रमुख नदियां हैं।

माही जल-निकासी

माही नदी प्रतापगढ़ जिले के पीपलखूंट और धरियावद खंडों का जल बहाकर ले जाती है।

जाखम प्रवाह मार्ग

जाखम नदी धरियावद, छोटी सादड़ी और प्रतापगढ़ खंडों से होकर गुजरती है।

जाखम उद्गम

जाखम नदी छोटी सादड़ी तहसील के उत्तर की पहाड़ियों में बसे जाखमिया गांव से निकलती है।

अभयारण्य क्षेत्र

सीता माता वन्यजीव अभयारण्य अरावली और विंध्याचल पर्वत-श्रेणियों में फैला 422.95 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र है।

संरक्षित वनक्षेत्र

राजस्थान सरकार ने 2 नवंबर 1979 की अधिसूचना से सीता माता अभयारण्य को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया था।

सागौन वनस्पति

सीता माता अभयारण्य सागौन के घने फैलाव के लिए जाना जाता है; यहां वनस्पति का लगभग 50 प्रतिशत भाग सागौन से जुड़ा है।

अर्थव्यवस्था — क्षेत्र, उद्योग, ऊर्जा

कृषि आधार

प्रतापगढ़ की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर टिकी है, और रोजगार व आजीविका का बड़ा आधार खेती ही है।

कृषि कार्यबल

प्रतापगढ़ जिले में 83.8 प्रतिशत कामगार किसान या कृषि मजदूर हैं।

खेती क्षेत्र

प्रतापगढ़ में 1,82,307 हेक्टेयर भूमि खेती के अधीन है।

किसान संख्या

2011 की जनगणना में जिले में 3,06,419 किसान दर्ज किए गए थे।

कृषि मजदूर

गजेटियर में उद्धृत 2011 की जनगणना के अनुसार प्रतापगढ़ में 96,815 कृषि मजदूर थे।

खरीफ फसलें

जिले में परंपरागत रूप से खरीफ की मुख्य फसलों में मक्का, ज्वार, कपास, दलहन, मूंगफली, गन्ना और धान शामिल रहे हैं।

रबी फसलें

रबी की फसलों में परंपरागत रूप से गेहूं, जौ, चना, तिलहन, मेथी, अलसी, धनिया और अफीम शामिल रहे हैं।

सिंचित फसलें

प्रतापगढ़ के सिंचित खेती वाले हिस्सों में खरीफ में सोयाबीन, मक्का और मूंगफली प्रमुख हैं, जबकि रबी में सरसों, गेहूं, चना और जौ मुख्य फसलें हैं।

सोयाबीन उत्पादन

2018-19 में प्रतापगढ़ जिले में सोयाबीन 1.29 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई और इसका उत्पादन 1.68 लाख टन रहा।

गेहूं उत्पादन

2018-19 में प्रतापगढ़ जिले में गेहूं का क्षेत्रफल 70,294 हेक्टेयर था और उत्पादन 2.81 लाख टन दर्ज हुआ।

औद्योगिक क्षेत्र

जिले में बगवास और प्रतापगढ़ नाम के दो औद्योगिक क्षेत्र हैं।

स्थानीय उद्योग

प्रतापगढ़ में स्लेट पत्थर, सीमेंट टाइल-जाली, अभियांत्रिकी इकाइयां, कोटा स्टोन और थेवा कला हस्तशिल्प से जुड़े उद्योग प्रमुख हैं।

राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरचना

आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र

प्रतापगढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र संख्या 172 है और यह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।

विधानसभा चुनाव परिणाम

2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के हेमंत मीणा ने प्रतापगढ़ अनुसूचित जनजाति सीट 87,644 मतों से जीती।

आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र

धरियावद विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र संख्या 157 है और यह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।

विधानसभा चुनाव परिणाम

2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में भारत आदिवासी पार्टी के थावर चंद ने धरियावद अनुसूचित जनजाति सीट जीती।

संभागीय प्रशासन

प्रतापगढ़ उदयपुर संभाग के छह जिलों में शामिल है।

शासन पहल एवं योजनाएँ (2025-26)

साक्षरता अभियान

सितंबर 2009 में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर प्रधानमंत्री ने साक्षर भारत की शुरुआत की थी; इसका मुख्य ध्यान महिलाओं की साक्षरता बढ़ाने पर था।

साक्षरता उपलब्धियां

प्रतापगढ़ के साक्षरता एवं सतत शिक्षा विभाग ने साक्षरता कार्यक्रम के तहत 2.22 लाख नवसाक्षर तैयार किए।

वयस्क शिक्षा केंद्र

साक्षर भारत के तहत ग्राम पंचायतों में 5,000 की आबादी पर एक वयस्क शिक्षा केंद्र स्थापित किया जाता है।

स्कूटी सहायता

कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना में कक्षा 12 में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाली जनजातीय छात्राओं को स्कूटी सहायता दी जाती है।

विद्युत क्षेत्र योजनाएं

प्रतापगढ़ जिले के लिए गजेटियर में बिजली क्षेत्र की योजनाओं में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, सौभाग्य योजना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना और कुसुम योजना दर्ज हैं।

विद्युत विकास निधि

एकीकृत विद्युत विकास योजना के तहत प्रतापगढ़ और छोटी सादड़ी के लिए 4.71 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।

PYQ एक-पंक्ति (RAS / RPSC / RSSB)

किसी भी परीक्षा उपयोग से पहले सटीक विकल्पों की जाँच आधिकारिक RPSC / RSSB प्रश्न पत्रों से करें।

प्रतापगढ़ के PYQ एक-पंक्ति तथ्य शीघ्र उपलब्ध होंगे।

स्वयं को परखें — 10 प्रश्न

ऊपर के जिला संदर्भ से क्विक सेल्फ़-टेस्ट। द्विभाषी, लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

प्रश्न 1 / 8

प्रतापगढ़ के राजस्थान का 33वां जिला बनने से कौन-सी तारीख जुड़ी है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में प्रतापगढ़ जिला कहां स्थित है?

यह राज्य के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है।

प्रतापगढ़ जिला किस संभाग में आता है?

प्रतापगढ़ उदयपुर संभाग का जिला है।

प्रतापगढ़ की सबसे प्रसिद्ध हस्तकला कौन-सी है?

थेवा यहां की प्रसिद्ध मीनाकारी-आधारित कांच आभूषण और सजावटी कला है।

प्रतापगढ़ जिले में कौन-सा प्रमुख अभयारण्य स्थित है?

सीता माता वन्यजीव अभयारण्य प्रतापगढ़ जिले का प्रमुख अभयारण्य है।

प्रतापगढ़ जिले की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार क्या है?

कृषि जिले का मुख्य आधार और प्रमुख आजीविका स्रोत है।