वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ONOS)
वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ONOS) एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जो अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तक देशव्यापी पहुंच प्रदान करती है। - केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 25 नवंबर 2024 को स्वीकृत; 1 जनवरी 2025 को लॉन्च - बजट: 3 वर्षों (2025-2027) के लिए 6,000 करोड़ रुपये - 30 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों से 13,000+ ई-पत्रिकाओं तक पहुंच - 6,300+ सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों और R&D केंद्रों को लाभ - लगभग 1.8 करोड़ छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को कवर करता है - INFLIBNET (UGC के तहत) द्वारा कार्यान्वित - ओपन एक्सेस प्रकाशन के लिए 150 करोड़ रुपये/वर्ष - टियर 2 और टियर 3 शहरों तक समान पहुंच - मार्च 2025 तक सभी 30 प्रकाशक समझौते पूर्ण - राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और विकसितभारत@2047 के अनुरूप
- वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ONOS) — 25 नवंबर 2024 को अनुमोदित, 1 जनवरी 2025 से लॉन्च, 3 वर्षों (2025-2027) के लिए ₹6,000 करोड़ बजट।
- 30 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों से 13,000+ ई-जर्नल्स तक देशव्यापी पहुँच।
- 6,300+ सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों एवं R&D केंद्रों को लाभ — लगभग 1.8 करोड़ छात्र, शिक्षक एवं शोधकर्ता कवर।
- ओपन एक्सेस प्रकाशन हेतु आर्टिकल प्रोसेसिंग चार्जेज़ के लिए ₹150 करोड़/वर्ष आवंटित।
- UGC के अंतर्गत INFLIBNET द्वारा कार्यान्वित; समान पहुँच हेतु टियर 2 एवं टियर 3 शहरों तक विस्तार।
- मार्च 2025 तक सभी 30 प्रकाशक समझौते पूर्ण; राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और विकसित भारत@2047 से संरेखित।
वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन योजना क्या है?
यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जो अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तक देशव्यापी पहुंच प्रदान करती है। इसका लाभ उच्च शिक्षा और शोध से जुड़े लोगों को मिलता है।
योजना कब स्वीकृत और शुरू हुई?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 25 नवंबर 2024 को स्वीकृत किया और योजना 1 जनवरी 2025 को शुरू हुई।
इस योजना का बजट और अवधि क्या है?
योजना का बजट 3 वर्षों, यानी 2025-2027 के लिए 6,000 करोड़ रुपये है। यह शोध पत्रिका पहुंच के लिए केंद्रित प्रावधान है।
योजना के तहत कितनी ई-पत्रिकाओं तक पहुंच मिलेगी?
संदर्भ के अनुसार 30 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों से 13,000 से अधिक ई-पत्रिकाओं तक पहुंच प्रदान की जाएगी।
इस योजना से किन लोगों को लाभ मिलेगा?
योजना से 6,300 से अधिक सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों और शोध केंद्रों के लगभग 1.8 करोड़ छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को लाभ मिलेगा।
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