ओडिशा के पुरी और सुनापुर समुद्र तटों को 2025–26 के लिए ब्लू फ्लैग प्रमाणन से सम्मानित किया गया — यह घोषणा डेनमार्क के पर्यावरण शिक्षा फाउंडेशन (FEE) द्वारा 15 नवंबर 2025 के आसपास की गई। सुनापुर बीच को लगातार तीसरी बार और पुरी बीच को ऐतिहासिक सातवीं बार यह प्रमाणन मिला — जो भारत में किसी एक समुद्र तट के लिए सर्वाधिक संख्या है। FEE द्वारा संचालित ब्लू फ्लैग कार्यक्रम समुद्र तटों, मरीनाओं और सतत नौकायन पर्यटन के लिए विश्व के सर्वाधिक मान्यता प्राप्त स्वैच्छिक इको-लेबलों में से एक है। प्रमाणन मानदंडों में ये शामिल हैं: पानी की स्वच्छ और सुरक्षित गुणवत्ता; पर्यावरण शिक्षा; पर्यावरण प्रबंधन; प्राकृतिक पर्यावरण संरक्षण। भारत में अब 13 ब्लू फ्लैग प्रमाणित समुद्र तट हैं। पर्यावरण मंत्रालय और TERI ने BEAMS कार्यक्रम के तहत प्रमाणन प्रक्रिया में सहयोग किया।
ब्लू फ्लैग प्रमाणन 2025–26: ओडिशा के पुरी और सुनापुर समुद्र तटों को स्वच्छ समुद्र तट का प्रतिष्ठित पर्यावरण लेबल मिला
ओडिशा के पुरी और सुनापुर समुद्र तटों को 2025–26 के लिए ब्लू फ्लैग प्रमाणन मिला — इसकी घोषणा डेनमार्क के पर्यावरण शिक्षा फाउंडेशन (FEE) ने 15 नवंबर 2025 के आसपास की। सुनापुर समुद्र तट को लगातार तीसरी बार और पुरी समुद्र तट को ऐतिहासिक सातवीं बार यह प्रमाणन मिला — भारत में किसी एक समुद्र तट के लिए यह सबसे अधिक संख्या है। FEE द्वारा संचालित ब्लू फ्लैग कार्यक्रम समुद्र तटों, मरीनाओं और सतत नौकायन पर्यटन के लिए दुनिया के सबसे मान्यता प्राप्त स्वैच्छिक इको-लेबलों में से एक है। इसके प्रमाणन मानदंडों में स्वच्छ और सुरक्षित पानी की गुणवत्ता, पर्यावरण शिक्षा, पर्यावरण प्रबंधन और प्राकृतिक पर्यावरण संरक्षण शामिल हैं। भारत में अब 13 ब्लू फ्लैग प्रमाणित समुद्र तट हैं। पर्यावरण मंत्रालय और TERI ने BEAMS कार्यक्रम के तहत प्रमाणन प्रक्रिया में मदद की।
मुख्य तथ्य
- पुरी बीच को 2025–26 में रिकॉर्ड सातवीं बार ब्लू फ्लैग प्रमाणन मिला।
- ओडिशा का सुनापुर बीच लगातार तीसरी बार प्रमाणित हुआ।
- ब्लू फ्लैग डेनमार्क के पर्यावरण शिक्षा फाउंडेशन से विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त इको-लेबल है।
- प्रमाणन के लिए पानी की स्वच्छता और गुणवत्ता, पर्यावरण शिक्षा और सुरक्षा सेवाएं आवश्यक हैं।
- भारत में अब 13 ब्लू फ्लैग प्रमाणित समुद्र तट हैं।
- पर्यावरण मंत्रालय के BEAMS कार्यक्रम ने प्रमाणन प्रक्रिया में मदद की।
6-अक्ष वर्गीकरण
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नवंबर 2025 में ओडिशा के सुनापुर बीच और पुरी के गोल्डन बीच को 2025-26 के लिए फिर किस अंतरराष्ट्रीय इको-लेबल के तहत मान्यता मिली?
ओडिशा के गंजाम जिले के सुनापुर बीच और पुरी के गोल्डन बीच को 2025-26 सत्र के लिए ब्लू फ्लैग प्रमाणन मिला। ब्लू फ्लैग एक अंतरराष्ट्रीय इको-लेबल है, जिसे Foundation for Environmental Education संचालित करता है। यह प्रमाणन उन समुद्र तटों को दिया जाता है जो जल गुणवत्ता, पर्यावरण प्रबंधन, सुरक्षा, सेवाओं और पर्यावरण शिक्षा के कड़े मानकों को पूरा करते हैं।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ब्लू फ्लैग प्रमाणन क्या है और इसे कौन सी संस्था प्रदान करती है?
ब्लू फ्लैग दुनिया भर में मान्यता प्राप्त स्वैच्छिक इको-लेबल है। डेनमार्क की संस्था पर्यावरण शिक्षा फाउंडेशन (FEE) इसे समुद्र तटों, मरीनाओं और सतत नौकायन पर्यटन को तब देती है, जब वे पानी की गुणवत्ता, पर्यावरण शिक्षा, सुरक्षा और सेवाओं के कड़े मानक पूरे करते हैं।
पुरी बीच को कितनी बार ब्लू फ्लैग प्रमाणन मिला है और यह रिकॉर्ड क्यों है?
ओडिशा के पुरी बीच को 2025–26 में रिकॉर्ड सातवीं बार ब्लू फ्लैग प्रमाणन मिला, जो भारत में किसी एक समुद्र तट को मिला सबसे अधिक बार का प्रमाणन है।
BEAMS कार्यक्रम क्या है और इसका ब्लू फ्लैग प्रमाणन से क्या संबंध है?
BEAMS यानी समुद्र तट पर्यावरण और सौंदर्य प्रबंधन सेवाएँ भारत के पर्यावरण मंत्रालय का कार्यक्रम है, जो तटीय राज्यों को स्वच्छता, बुनियादी ढाँचे और पर्यावरण शिक्षा के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय ब्लू फ्लैग मानकों को पूरा करने में मदद करता है।
2025–26 तक भारत में कितने ब्लू फ्लैग प्रमाणित समुद्र तट हैं?
2025–26 तक भारत के तटीय राज्यों में कुल 13 ब्लू फ्लैग प्रमाणित समुद्र तट हैं, जिनमें ओडिशा के पुरी और सुनापुर समुद्र तट प्रमुख हैं।
किसी समुद्र तट को ब्लू फ्लैग प्रमाणन पाने के लिए कौन से मुख्य मानदंड पूरे करने होते हैं?
एक समुद्र तट को चार क्षेत्रों में मानदंड पूरे करने होते हैं: जल गुणवत्ता (WHO/EU मानक), पर्यावरण शिक्षा और सूचना, पर्यावरण प्रबंधन (कचरा, धूम्रपान-मुक्त क्षेत्र) और सुरक्षा व सेवाएँ (लाइफगार्ड, प्राथमिक चिकित्सा, सुलभ सुविधाएँ)।
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