मुख्य तथ्य

  • द्वितीय प्रश्न-पत्र सामाजिक विज्ञान में 150 बहुविकल्पीय प्रश्न, 300 अंक और गलत उत्तर पर एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन है।
  • पाठ्यक्रम इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, दर्शन और शिक्षण विधियों तक फैला है।
  • इतिहास में प्राचीन भारत, मध्यकालीन आंदोलन और शक्तियां, राष्ट्रीय आंदोलन, आधुनिक विश्व क्रांतियां और दोनों विश्व युद्ध शामिल हैं।
  • भूगोल में पृथ्वी की गतियां, अक्षांश-देशांतर, पृथ्वी की आंतरिक संरचना, वायुमंडल, महासागर, भारत और राजस्थान के भूगोल को जोड़कर पढ़ना चाहिए।
  • अर्थशास्त्र में मांग, पूर्ति और राष्ट्रीय आय जैसी अवधारणाओं के साथ सुधार, गरीबी और बेरोजगारी जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था विषय पूछे जा सकते हैं।

मुख्य बिंदु

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    द्वितीय प्रश्न-पत्र सामाजिक विज्ञान में 150 बहुविकल्पीय प्रश्न, 300 अंक और गलत उत्तर पर एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन है।

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    पाठ्यक्रम इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, दर्शन और शिक्षण विधियों तक फैला है।

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    इतिहास में प्राचीन भारत, मध्यकालीन आंदोलन और शक्तियां, राष्ट्रीय आंदोलन, आधुनिक विश्व क्रांतियां और दोनों विश्व युद्ध शामिल हैं।

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    भूगोल में पृथ्वी की गतियां, अक्षांश-देशांतर, पृथ्वी की आंतरिक संरचना, वायुमंडल, महासागर, भारत और राजस्थान के भूगोल को जोड़कर पढ़ना चाहिए।

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    अर्थशास्त्र में मांग, पूर्ति और राष्ट्रीय आय जैसी अवधारणाओं के साथ सुधार, गरीबी और बेरोजगारी जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था विषय पूछे जा सकते हैं।

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    राजनीतिक विज्ञान में संप्रभुता और वैधता जैसी सिद्धांत-अवधारणाएं भारतीय संविधान, दलीय व्यवस्था, स्थानीय शासन और विदेश नीति से जुड़ती हैं।

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    समाजशास्त्र में समाज, समुदाय, संस्था, समूह, प्रस्थिति, भूमिका, जाति और वर्ग के स्पष्ट अंतर याद रखना ज़रूरी है।

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    लोक प्रशासन में विषय का विकास और सामाजिक भूमिका, प्रशासनिक व्यवहार, राजनीतिक और स्थायी कार्यपालिका के संबंध, जनता की भागीदारी, लोकपाल और लोकायुक्त तथा जिला प्रशासन शामिल हैं।

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    दर्शन में वैदिक और उपनिषदिक अवधारणाएं, ज्ञान और सही परिभाषाओं पर सुकराती विचार, यूनानी नीतिशास्त्र, सुखवाद, उपयोगितावाद, कांट का नैतिक सिद्धांत, इच्छा-स्वातंत्र्य, दंड-सिद्धांत, भारतीय नीतिशास्त्र और योग का अष्टांग साधन शामिल हैं।

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    सामाजिक विज्ञान शिक्षण में उद्देश्य, सहसंबंध, शिक्षण विधियां, सामग्री, शिक्षक की भूमिका, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005, योजना, मूल्यांकन, ब्लूप्रिंट और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन आते हैं।

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    राजस्थान से जुड़े विषय भूगोल और लोक प्रशासन में आते हैं, इसलिए राज्य की संस्थाओं और उसके भौतिक व आर्थिक भूगोल को नहीं छोड़ना चाहिए।

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    हर पाठ्यक्रम-शब्द के लिए एक परिभाषा, एक उदाहरण और एक तुलना तैयार करना सबसे उपयोगी पुनरावृत्ति पद्धति है।

वरिष्ठ अध्यापक सामाजिक विज्ञान पेपर की बनावट कैसी है?

वरिष्ठ अध्यापक सामाजिक विज्ञान पेपर की बनावट ऐसी है कि यह इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, दर्शन और शिक्षण विधियों को एक ही प्रश्न-पत्र में जोड़ता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग के आधिकारिक सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में पेपर-द्वितीय के लिए 8 बड़े खंड सूचीबद्ध हैं। वरिष्ठ अध्यापक परीक्षा में द्वितीय प्रश्न-पत्र का सामाजिक विज्ञान भाग किसी एक इतिहास या भूगोल परीक्षा जैसा संकीर्ण नहीं है। आधिकारिक पाठ्यक्रम के अनुसार सामाजिक विज्ञान द्वितीय प्रश्न-पत्र में आता है; प्रश्न-पत्र 300 अंकों का होता है, 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं, समय दो घंटे तीस मिनट रहता है और गलत उत्तर पर उस प्रश्न के निर्धारित अंकों का एक-तिहाई ऋणात्मक अंकन लागू होता है। इसी पाठ्यक्रम में संबंधित विषय का माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर का ज्ञान, स्नातक स्तर का ज्ञान और शिक्षण विधियां भी शामिल हैं। इसलिए तैयारी केवल तथ्य याद करने की नहीं, बल्कि अवधारणाओं की स्पष्टता और कक्षा-प्रयोग की समझ की भी मांग करती है। अभ्यर्थी को इसे सात विषयों और शिक्षण विधियों वाले संयुक्त प्रश्न-पत्र के रूप में पढ़ना चाहिए: इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, दर्शन और सामाजिक विज्ञान शिक्षण विधियां।

तैयारी को तीन हिस्सों में बांटें। पहला हिस्सा तथ्य याद करने का है: तिथियां, राजवंश, आंदोलन, भौगोलिक शब्द, आर्थिक अवधारणाएं, संवैधानिक अनुच्छेद, संस्थाएं, दार्शनिक और शिक्षण विधियां। दूसरे हिस्से में तुलनात्मक समझ रखें: मांग और पूर्ति, वृद्धि और विकास, शक्ति और सत्ता, जाति और वर्ग, मौसम और जलवायु, अधिकार और कर्तव्य, व्याख्यान विधि और परियोजना विधि, निर्माणात्मक और योगात्मक मूल्यांकन। तीसरे हिस्से में सीखी हुई बातों को पहचानकर लागू करने का अभ्यास करें: किस विषय के लिए कौन-सी शिक्षण सामग्री उपयुक्त है, प्रशासनिक नियंत्रण विधायी है या न्यायिक, कौन-सा पवन कटिबंध किस अक्षांश क्षेत्र से जुड़ा है, या राष्ट्रीय आंदोलन की कोई घटना किस चरण में आती है।

पाठ्यक्रम भारत, राजस्थान और विश्व तीनों को जोड़ता है, इसलिए प्रश्न सीधे भी आ सकते हैं और संबंध-आधारित भी। इतिहास में सिंधु घाटी सभ्यता को नगरीय नियोजन से, वैदिक युग को वर्ण और आश्रम से, बौद्ध-जैन परंपराओं को कर्मकांड-विरोधी धारा से, मौर्यों को मौर्य साम्राज्य की शासन-व्यवस्था से, गुप्तों को कला और विज्ञान से तथा राष्ट्रीय आंदोलन को जनता की भागीदारी से जोड़ा जा सकता है। भूगोल में पृथ्वी की गतियां, अक्षांश-देशांतर, पृथ्वी की आंतरिक संरचना, अनाच्छादन, भूकंप, वायुमंडल, महासागर, भारत और राजस्थान आते हैं। अर्थशास्त्र में राष्ट्रीय आय, मुद्रा-पूर्ति, बैंक, मुद्रास्फीति, गरीबी, बेरोजगारी, मानव विकास और सतत विकास लक्ष्य पूछे जा सकते हैं। राजनीतिक विज्ञान राज्य और संप्रभुता से शुरू होकर भारतीय संविधान, शासन-व्यवस्था, दलीय व्यवस्था, स्थानीय स्वशासन, विदेश नीति और वैश्विक समूहों तक जाता है।

इस व्यापक प्रश्न-पत्र में पूरे पाठ्यक्रम की व्यवस्थित तैयारी ही अंक दिलाती है। इतिहास और भूगोल को बहुत गहरा पढ़कर समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, दर्शन और शिक्षण विधियों को बाद के लिए छोड़ देना जोखिमपूर्ण है। ये छोटे दिखने वाले भाग अक्सर साफ अवधारणात्मक प्रश्न देते हैं, क्योंकि इनके पाठ्यक्रम-विषय बहुत स्पष्ट हैं: लोक प्रशासन का विकास और सामाजिक भूमिका, प्रशासनिक व्यवहार, राजनीतिक और स्थायी कार्यपालिका के संबंध, जनता की भागीदारी, लोकपाल और लोकायुक्त, जिला प्रशासन, निष्काम कर्म, सुकराती पद्धति, उपयोगितावाद, ब्लूप्रिंट और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन। अच्छी तैयारी में हर सूचीबद्ध शब्द के लिए एक पंक्ति की परिभाषा, एक उदाहरण और एक तुलना तैयार रहती है। यही अभ्यास मिलान-प्रश्नों को आसान बनाता है और मिलते-जुलते शब्दों में भ्रम घटाता है।

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